महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुनामा रणविक्रान्तः समग्राक्षौहिणीपतिः ।
भोजराजस्य मध्यस्थो भ्राता कंसस्य वीर्यवान् ॥ ७ ॥
बलदेवद्वितीयेन कृष्णेनामित्रघातिना ।
तरस्वी समरे दग्धः ससैन्यः शूरसेनराट् ॥ ८ ॥
शत्रुहन्ता श्रीकृष्णने बलरामजीके साथ जाकर युद्धमें पराक्रम दिखानेवाले, बलवान्, वेगवान्, सम्पूर्ण अक्षौहिणी सेनाओंके अधिपति, भोजराज कंसके मझले भाई शूरसेन देशके राजा सुनामाको समरमें सेनासहित दग्ध कर डाला ॥
दुर्वासा नाम विप्रर्षिस्तथा परमकोपनः ।
आराधितः सदारेण स चास्मै प्रददौ वरान् ॥ ९ ॥
पत्नीसहित श्रीकृष्णने परम क्रोधी ब्रह्मर्षि दुर्वासाकी आराधना की। अतः उन्होंने प्रसन्न होकर उन्हें बहुत-से वर दिये ॥ ९ ॥
तथा गान्धारराजस्य सुतां वीरः स्वयंवरे ।
निर्जित्य पृथिवीपामानावहत् पुष्करेक्षणः ॥ १० ॥
अमृष्यमाणा राजानो यस्य जात्या हया इव ।
रथे वैवाहिके युक्ताः प्रतोदेन कृतव्रणाः ॥ ११ ॥
कमलनयन वीर श्रीकृष्णने स्वयंवरमें गान्धारराजकी पुत्रीको प्राप्त करके समस्त राजाओंको जीतकर उसके साथ विवाह किया। उस समय अच्छी जातिके घोड़ोंकी भाँति श्रीकृष्णके वैवाहिक रथमें जुते हुए वे असहिष्णु राजालोग कोड़ोंकी मारसे घायल कर दिये गये थे ॥ १०-११ ॥
जरासंधं महाबाहुमुपायेन जनार्दनः ।
परेण घातयामास समग्राक्षौहिणीपतिम् ॥ १२ ॥
जनार्दन श्रीकृष्णने समस्त अक्षौहिणी सेनाओंके अधिपति महाबाहु जरासंधको उपायपूर्वक दूसरे योद्धा (भीमसेन)-के द्वारा मरवा दिया ॥ १२ ॥
चेदिराजं च विक्रान्तं राजसेनापतिं बली ।
अर्घ्ये विवदमानं च जघान पशुवत् तदा ॥ १३ ॥
बलवान् श्रीकृष्णने राजाओंकी सेनाके अधिपति पराक्रमी चेदिराज शिशुपालको अग्रपूजनके समय विवाद करनेके कारण पशुकी भाँति मार डाला ॥ १३ ॥
सौभं दैत्यपुरं खस्थं शाल्वगुप्तं दुरासदम् ।
समुद्रकुक्षौ विक्रम्य पातयामास माधवः ॥ १४ ॥
तत्पश्चात् माधवने आकाशमें स्थित रहनेवाले सौभ नामक दुर्धर्ष दैत्य-नगरको, जो राजा शाल्वद्वारा सुरक्षित था, समुद्रके बीच पराक्रम करके मार गिराया ॥
अङ्गान् वङ्गान् कलिङ्गांश्च मागधान् काशिकोसलान् ।
वात्स्यगार्ग्यकरूषांश्च पौण्ड्रांश्चाप्यजयद् रणे ॥ १५ ॥