माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ६७ )
वातादिभेदकरके उसके लक्षण ।
वातेन तोदपारुष्ये पित्तादतिसरक्तता ।
श्लेष्मणा स्निग्धता चास्य ग्रथितत्वं सवर्णता ॥ ५२ ॥
वातसे सुईके चुभानेसे जैसे पीडा होती है ऐसी पीडा हो, पित्तसे कठोरता,
कफसे काला और कुछ तथा चिकनी गांठके समान वर्ण होवै ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरी-
भाषाटीकायामर्शोरोगः समाप्तः ॥
अथ मन्दाग्निरोगनिदानम् ।
अर्शरोगसे मन्दाग्नि होती हैं, इसीसे मन्दाग्निरोगको कहते हैं—
मन्दस्तीक्ष्णोऽथ विषमः समश्चेति चतुर्विधः ।
कफपित्तानिलाधिक्यात्तत्साम्याज्जाठरोऽनलः ॥ १ ॥
मनुष्यके कफकी प्रकृतिसे मंदाग्नि, पित्तकी प्रकृतिसे तीक्ष्णाग्नि, वातकी प्रकृ-
तिसे विषमाग्नि तथा वात, पित्त, कफ इनके समान होनेसे समाग्नि होवे है । ऐसी
अग्नि चार प्रकारकी है । इसमें मन्दाग्निको दुर्जय होनेसे प्रथम कही और जाठर
शब्द कहनेसे धातुकी अग्निका त्याग जानना ॥
अजीर्णरोग ।
विषमो वातजान् रोगांस्तीक्ष्णः पित्तनिमित्तजान् ।
करोत्यग्निस्तथा मन्दो विकारान् कफसंभवान् ॥ २ ॥
विषमाग्नि वातजन्य ८० रोगोंमेंसे किसी रोगको प्रगट करे और सामान्य ज्वरा-
तिसारादिकको प्रगट करे, तीक्ष्णाग्नि पित्तके ४० रोगोंमेंसे किसी रोगको प्रगट
करे । उसी प्रकार मन्दाग्नि कफजन्य २० रोगोंमेंसे किसी रोगको पैदा कर आल-
स्यादिकोंको उत्पन्न करती है ॥
समाग्न्यादिकोंके लक्षण ।
समा समाग्नेरशिता मात्रा सम्यग्विपाच्यते । स्वल्पापि नैव
मन्दाग्नेर्विषमाग्नेस्तु देहिनः ॥ ३ ॥ कदाचित्पच्यते सम्यक्