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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 404 में से

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पृष्ठ 83

भाषाटीकासमेत । ( ६५ )
मैले वस्त्रवाला, बुरा बोलनेवाला, अभिमानी, व्यवहारमें न समझे और जो
बिना बुलाये आवे ये पांच वैद्य श्रीधन्वन्तरिके समान भी हों तो भी पूजने
योग्य नहीं हैं ॥
रोगीके लक्षण ।
आयुष्मान् सत्त्ववान् साध्यो द्रव्यवानात्मवानपि ।
उच्यते व्याधितः पादो वैद्यवाक्यकृदास्तिकः ॥ ४३ ॥
आयुवाला, बलयुक्त साध्य, द्रव्यवान्, ज्ञानी, वैद्यका आज्ञाकारी और आस्तिक
ऐसा रोगी होना चाहिये ॥
उत्तम औषधिके लक्षण ।
प्रशस्तदेशसंभूतं प्रशस्तेऽहनि चोद्धृतम् ।
अल्पमात्रं बहुगुणं गन्धवर्णरसान्वितम् ॥ ४४ ॥
उत्तम स्थानोंमें प्रगट हुई हो और शुभ दिनमें उसको उखाडी हो, थोडी
मात्रा देनेसे बहुत गुण करे, दुर्गंधरहित, उत्तम स्वरूप और रसयुक्त हो सो
औषधि उत्तम है ॥
दुष्ट औषधिके लक्षण ।
वल्मीककुत्सितानूपश्मशानोषरमार्गजाः ।
जन्तुवह्निहिमव्याप्ता नौषध्यः कार्यसाधकाः ॥ ४५ ॥
इतने स्थानकी औषधें कार्य करनेवाली नहीं होती हैं-बांबीकी, खोटी धरतीकी,
जलके समीपकी, इमशानकी, ऊषरकी, जहां रेहं चूना निकलता होय तहांकी और
रास्तेकी, कीडोंकी खाई, अग्निसे जली हुई, जाडेकी मारी ऐसी औषधें कार्य करने-
वाली नहीं हैं ॥
दूतके लक्षण ।
स्निग्धोऽजुगुप्सुर्बलवान् युक्तो व्याधितरक्षणे ।
वैद्यवाक्यकृदश्रान्तः पादः परिचरः स्मृतः ॥ ४६ ॥
नवीन अवस्थाका, बलवान्, रोगीकी रक्षा करनेमें तत्पर होवे, वैद्यके वचनका
करनेवाला होवे, आलस्यरहित ऐसा परिचारक अर्थात् दूत होय । इन पूर्वोक्तको
चतुष्पाद सम्पत्ति कहते हैं सो यह आयु शेषके बिना नहीं मिलते ॥
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