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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 404 में से

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पृष्ठ 60

( ४२ ) माधवनिदान ।
इस ज्वरमें वैद्य औषधी न दे, अपक्व ज्वरमें औषधि देनेसे ज्वरकी वृद्धि होती है
और शोधन तथा शमन औषध देनेसे विषमज्वरको करे हैं ॥
ज्वरके दश उपद्रव ।
श्वासो मूर्च्छाऽरुचिस्तृष्णा छर्द्यतीसारविङ्ग्रहः ।
हिक्का श्वासोऽङ्गदाहश्च ज्वरस्योपद्रवा दश ॥ ६० ॥
भावप्रकाशके मतसे दश उपद्रवोंको कहते हैं-श्वास, मूर्च्छा, अरुचि, प्यास, वमन,
अतीसार, मलका रुकना, हिचकी, खांसी, देहमें दाह ये ज्वरके दश उपद्रव हैं ॥
पच्यमान ज्वरके लक्षण ।
ज्वरवेगोऽधिका तृष्णा प्रलापः श्वसनं भ्रमः ।
मलप्रवृत्तिरुत्क्लेशः पच्यमानस्य लक्षणम् ॥ ६१ ॥
ज्वरका वेग, अधिक प्यास, प्रलाप, भ्रम, मलकी प्रवृत्ति, उपस्थित वमनसी
मालूम होय ये पच्यमान ज्वरके लक्षण हैं ॥
पक्वज्वर किंवा निरामज्वरके लक्षण ।
क्षुत्क्षामता लघुत्वं च गात्राणां ज्वरमार्दवम् ।
दोषप्रवृत्तिरुत्साहो निरामज्वरलक्षणम् ॥ ६२ ॥
भूखका लगना, देहका कृश होना, अंगोंका हलकापना, मन्द ज्वरका आना,
अधोवायुकी प्रवृत्ति होना, मनमें उत्साहका होना ये निरामज्वरके लक्षण जानने ॥
ग्रन्थांतरसे जीर्णज्वरके लक्षण ।
त्रिःसप्ताहे व्यतीते तु ज्वरो यस्तनुतां गतः ।
प्लीहाग्निसार्द कुरुते स जीर्णज्वर उच्यते ॥ ६३ ॥
२१ दिवस व्यतीत होनेपर जो ज्वर बारीक हो देहमें रहे जिससे प्लीहा अर्थात्
तापातिल्ली रोग और मन्दाग्नि होवे उसको जीर्णज्वर कहते हैं ॥
साध्यज्वरके लक्षण ।
बलवत्स्वल्पदोषेषु ज्वरः साध्योऽनुपद्रवः ।
बलवान् पुरुषके थोडे दोषयुक्त और श्वास आदि उपद्रव करके रहित जो ज्वर
हो वह साध्य जानना ।
असाध्यज्वरके लक्षण ।
हेतुभिर्बहुभिर्जातो बलिभिर्बहुलक्षणः ।
ज्वरः प्राणान्तकृद्यश्च शीघ्रमिन्द्रियनाशनः ॥ ६४ ॥
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