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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 343, कुल 404 में से

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पृष्ठ 343

भाषाटीकासमेत । ( ३२६ )
दृष्टिरागो भवेच्चित्रो लिंगनाशे त्रिदोषजे ।
यथास्वं दोषलिङ्गानि सर्वेष्वेव भवंति हि ॥ ५६ ॥
वादीसे दृष्टिमण्डल लाल, चञ्चल और खरदरा होता है । पित्तसे दृष्टिमण्डल
किञ्चित् नीला तथा काँसेके समान पीला होवे । कफसे भारी चिकना शंख कुन्द-
फूल और चन्द्र इनके समान सफेद होय और उसके नेत्रमें हलनेवाली कमलपत्रके
ऊपर पानीकी बूँदके समान टेढी तिरछी सफेद बून्द फैलीसी दिखलाई दे । रुधिरसे
दृष्टिमण्डल मूंगाके समान अथवा लाल कमलके समान लाल होवे और त्रिदोषज
लिंगनाशमें तरह तरहके मण्डल होयँ तथा सर्व दोषोंके लिंगमण्डलमें वातादि दोषोंके
न्यारे २ लक्षण होयँ ॥
आगे कहेगये और पीछे कहे ऐसे दृष्टिरोगोंकी संख्या ।
षड्लिङ्गनाशाः षडिमे च रोगा दृष्ट्याश्रयाः षट् च षडेव च स्युः ५७
पूर्व कहे लिंगनाश रोग छः और आगे विदग्धदृष्ट्यादि कहे गये वे छः ऐसे मिल-
कर बारह दृष्टिरोग होते हैं ॥
पित्तविदग्धके लक्षण ।
पित्तेन दुष्टेन गतेन वृद्धिं पीता भवेद्यस्य नरस्य दृष्टिः ।
पीतानि रूपाणि च तेन पश्येत्स वै नरः पित्तविदग्धदृष्टिः ॥ ५८ ॥
पित्त दुष्ट होकर बढनेसे जिस मनुष्यकी दृष्टि पीली होय तथा उसके योगसे उस
मनुष्यको सब पदार्थ पीले रंगके दीखें, उस दृष्टिको पित्तविदग्ध कहते हैं ॥
दिवांध्यके लक्षण ।
प्राप्ते तृतीयं पटलं च दोषे दिवा न पश्येन्निशि वीक्षते सः ।
रात्रौ स शीतानुगृहीतदृष्टिः पित्ताल्पभावादपि तानि पश्येत् ॥ ५९ ॥
तीसरे पटलमें दोष ( पित्त ) जानेसे दिनमें रोगीको नहीं दीखे, रात्रिमें शीतल-
ताके कारण पित्त कम होनेसे दीखे ॥
कफविदग्धदृष्टिके लक्षण ।
तथा नरः श्लेष्मविदग्धदृष्टिस्तान्येव शुक्लानि हि मन्यते तु ।
इसी प्रकार कफविदग्ध पुरुषको सफेद रूप दीखे ॥
नक्तांध्य ( रतौंध ) के लक्षण ।
त्रिषु स्थितो यः पटलेषु दोषो नक्तांध्यमापादयति प्रसय ।
दिवा स सूर्यानुगृहीतदृष्टिः पश्येत्तु रूपाणि कफाल्पभावात् ॥ ६० ॥
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