माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 258, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( २४० ) माधवनिदान ।
कमरकी कपाल हड्डी टूटगई हो अथवा संधिके पासकी हड्डी हटगई हो अथवा
स्थानसे छूटगई हो, जंघाकी हड्डीका चूर होगया हो ऐसे रोगीको वैद्य त्याग दे ॥
असंश्लिष्टकपालं च ललाटे चूर्णितं च यत् ।
भग्नं स्तनान्तरे पृष्ठे शंखे मूर्ध्नि च वर्जयेत् ॥ ९ ॥
ललाटकी हड्डी टुकडे टुकडे हो परस्पर दूर हो जाय, जुडनेके कामके न रहे,
अथवा स्तनके बीचकी अथवा पीठकी अथवा शंख (कनपटी) की हड्डी, मस्तककी
हड्डी टूट गई हो उसको वैद्य त्याग दे ॥
सावधानता न करनस असाध्यता दिखाते हैं-
सम्यक्संधितमप्यस्थि दुर्निक्षेपनिबंधनात् ।
संक्षोभाद्वापि यद्गच्छेत्क्रियां तच्च वर्जयेत् ॥ १० ॥
हड्डी भली प्रकार जुड भी गई हो उसको अच्छी रीतिसे न राखे अथवा अच्छी
रीतिसे बांधे नहीं, उसमें किसीका धक्का लगनेसे फिर जैसेका तैसा हो जाता है और
यह साध्य नहीं होय इसको वैद्य त्याग दे ॥
अस्थिविशेष करके भग्नविशेष कहते हैं-
तरुणास्थीनि नम्यन्ते भिद्यन्ते नलकानि च ।
कपालानि विभज्यन्ते स्फुटन्ति रुचकानि च ॥ ११ ॥
तरुण हड्डी नम जाती है या टेढी हो जाती है, नलक हड्डी चिर जाती है।
कपालास्थि फूट टूक कर टूक हो जाय, रुचकास्थि (दन्तादिक) हड्डी टुकडा
होकर गिरपडे ॥
इति श्रीपंडितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
भग्ननिदानं समाप्तम् ॥
१ सुश्रुते-जानुनितंबांसगण्डतालुशंखवंक्षणशिरःसु कपालानीति ।