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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 249, कुल 404 में से

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पृष्ठ 249

भाषाटीकासमेत । ( २३१ )
जिसका घाव कबूतरके रंगसदृश होय और जिसमें क्लेद न बहता होय और
घाव स्थिर हो, जिसमें फुन्सीसी मालूम हों उसको वैद्य जाने कि, यह व्रण ( घाव )
स्थिर भरनेवाला है ॥
जो व्रण भरगया हो उसके लक्षण ।
रूढवर्त्मानमग्रंथिमशूनमरुजं व्रणम् ।
त्वक्सवर्णं समतलं सम्यग्रूढं तमादिशेत् ॥ ११ ॥
जिसका मार्ग भरगया होय, गांठ रहित होय, सूजन और पीडा जिसमें नहीं
होय, त्वचाके समान वर्ण होगया हो, घावका गढेला भरकर बराबर हो गया हो वह
व्रण उत्तम भरा जानना ॥
व्याधिविशेषकरके व्रण कृच्छ्रसाध्य होता है सो कहते हैं-
कुष्ठिनां विषजुष्टानां शोषिणां मधुमेहिनाम् ।
व्रणाः कृच्छ्रेण सिध्यन्ति येषां चापि व्रणे व्रणाः ॥ १२ ॥
कोढी पुरुष, विषवाला पुरुष, क्षयीरोगवाला, मधुमेही पुरुष ऐसोंका व्रण बड़े
कष्टसे साध्य होता है और जिसके पहले व्रणमें व्रण प्रगट होय, उसके ये व्रण
कष्टसाध्य होते हैं ॥
साध्यासाध्य लक्षण ।
वसां मेदोऽथ मज्जानं मस्तुलुङ्गं च यः स्रवेत् ।
आगन्तुजो व्रणः सिध्येन्न सिध्येद्दोषसंभवः ॥ १३ ॥
जिस व्रणमेंसे चर्बी, मेद, मज्जा और बस्तिस्नेह ये बहें वह व्रण आगन्तुज होय
तो साध्य है और दोषकृत होय तो साध्य नहीं होय ॥
असाध्यव्रणके लक्षण ।
मद्यागुर्वाज्यसुमनःपद्मचन्दनचम्पकैः ।
सुगन्धा दिव्यगन्धाश्च मुमूर्षूणां व्रणाः स्मृताः ॥ १४ ॥
मद्य, अगर, घृत, फूल, कमल, चन्दन और चम्पाके फूलके समान अथवा
चमत्कारी पारिजात आदि फूलकीसी गन्ध जिस व्रणमेंसे आवे यह व्रण मरनेवाले
रोगीके जानना ॥
दूसरे असाध्य लक्षण ।
ये च मर्मस्वसंभूता भवन्त्यत्यर्थवेदनाः ।
दह्यन्ते चान्तरत्यर्थं बहिःशीताश्च ये व्रणाः ॥ १५ ॥
दह्यन्ते बहिरत्यर्थं भवन्त्यंतश्च शीतलाः ।