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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 170, कुल 404 में से

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पृष्ठ 170

( १५२ ) माधवनिदान ।
प्रतूनीके लक्षण ।
गुदोपस्थोत्थिता चैव प्रतिलोमं प्रधावति ।
वेगैः पक्वाशयं याति प्रतूनी चेह सोच्यते ॥ ६५ ॥
गुदा और उपस्थ इनसे उठी जो पीडा उलटी ऊपर जायकर प्राप्त हो और जोरसें
पक्वाशयमें प्राप्त हो और तूनीके समान पीडा करे उसको प्रतूनी कहते हैं ॥
आध्मानरोगके लक्षण ।
साटोपमत्युग्ररुजमाध्मानमुदरं भृशम् ।
आध्मानमिति जानीयाद्घोरं वातनिरोधजम् ॥ ६६ ॥
गुडगुडशब्दयुक्त अत्यन्त पीडायुक्त ऐसा उदर (पक्वाशय) अत्यन्त फूले अर्थात्
बादीसे भरकर चामकी थैलीके समान होजाय इस भयंकर रोगको आध्मानरोग
कहते हैं, यह वातके रुकनेसे होता है ॥
प्रत्याध्मानके लक्षण ।
विमुक्तपार्श्वहृदयं तदेवामाशयोत्थितम् ।
प्रत्याध्मानं विजानीयात्कफव्याकुलितानिलम् ॥ ६७ ॥
और वही आध्मानरोग आमाशयमें उत्पन्न होय तो उसको प्रत्याध्मान कहते हैं
इसमें पसवाडे और हृदयमें पीडा नहीं होय और वायु कफकरके व्याकुल हो ॥
वाताष्ठीलाके लक्षण ।
नाभेरधस्तात्सञ्जातः सञ्चारी यदि वाऽचलः ।
अष्ठीलावद् घनो ग्रन्थिरूर्ध्वमायत उन्नततः ॥
वाताष्ठीलां विजानीयाद्बहिर्मार्गावरोधिनीम् ॥ ६८ ॥
नाभीके नीचे उत्पन्न भई और इधर उधर फिरे अथवा अचल अष्ठीला (गोल-
पाषाण) के समान कठिन ऊपरका भाग कुछ लम्बा होय और आडी कुछ ऊंची
होय और बहिर्मार्ग कहिये अधोवायु, मल, मूत्र इनका अवरोध कहिये (रुकना)
हो ऐसे गांठको वाताष्ठीला कहते हैं ॥
१ "श्रमातुरण पानीयं पीत्वा वेगविधारणम् । धावतो वा पिबेत्तोयं भुञ्जतो वा विदाहि
च ॥ तथा पयोऽम्बुपानाद्वा दुर्जरा पललेन वा । साऽष्ठीला नाम विख्याता गुर्वी कुक्षिश्रितापि
वा" इति आत्रेयः।