माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १५१ )
ऊंची नीची जगहमें पैर पडनेसे अथवा श्रमके होनेसे कुपित वायु टकनोंमें प्राप्त
होकर पीडा करे तो इस रोगको वातकण्टक कहते हैं ॥
पादहर्षके लक्षण ।
पादयोः कुरुते हर्षं पित्तासृक्सहितोऽनिलः ।
विशेषतश्च क्रमतः पादहर्षं तमादिशेत् ॥ ६१ ॥
जिसके पैर हर्षयुक्त झनझनाहट पीडायुक्त होंय और अत्यन्त सोय जावें उसको
पादहर्ष रोग कहते हैं । यह कफवातके कोपसे होय है ॥
अंसशोष अपबाहुकके लक्षण ।
अंसदेशे स्थितो वायुः शोषयेदंसबन्धनम् ।
शिराश्चाकुंच्य तत्रस्थो जनयेदपबाहुकम् ॥ ६२ ॥
कन्धेम रहा जो वायु सो कुपित होकर उसके बन्धनको सुखाय दे तब अंस-
शोष रोग प्रगट होय और कन्धेमें रहा जो वायु सो नसोंको संकोच करके अप-
बाहुक रोग प्रगट करे ॥
मूकादिक तीन रोगोंके लक्षण ।
आवृत्य वायुः सकफो धमनीः शब्दवाहिनीः ।
नरानकरोत्यक्रियकान्मूकमिन्मिनगद्गदान् ॥ ६३ ॥
कफयुक्त वायु शब्दके बहनेवाली नाडियोंमें प्राप्त होकर मनुष्योंकी वचन-
क्रियारहित मूक, मिन्मिन और गद्गद ऐसा करदे । मूक कहिये जिससे बोला न
जाय, मिन्मिन कहिये गिनगिनायकर नाकसे बोले और गद्गद बोलते समय बीचमें
पद और व्यञ्जनोंको न बोले और मन्द बोले इन रोगोंके कारण सदृश होकर
रोगोंके भिन्न भिन्न प्रकार होते हैं । वे दोषोंके उत्कर्ष करके अथवा प्रारब्धवशसे
होते हैं ऐसा जानना ॥
तूनीरोगके लक्षण ।
अधो या वेदना याति वर्च्चोमूत्राशयोत्थिता ।
भिन्दन्तीव गुदोपस्थं सा तूनी नाम नामतः॥ ६४ ॥
पक्वाशय और मूत्राशयसे उठी जो पीडा सो नीचे जाकर प्राप्त हो और गुदा
तथा उपस्थ कहिये स्त्रीपुरुषोंके गुह्यस्थान इनमें भेद करे अर्थात् पीडा करे उसको
तूनीरोग कहते हैं ॥
१ अद्य इति गुदोपस्थम् ।