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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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पृष्ठ 95

एकादशराशिकप्रकारः । (७९)
अथैकादशराशिकोदाहरणम्-
अब एकादश राशिके उदाहरण लिखते हैं-
पट्टा ये प्रथमोदितप्रमितयो गव्यूतिमात्रे स्थिता-
स्तेषामानयनाय चेच्छकटिनां द्रम्माष्टकं भाटकम् ॥
अन्ये ये तदनन्तरं निगदिता माने चतुर्वर्जिता-
स्तेषां का भवतीति भाटकमितिर्गव्यूतिषट्के वद ॥ ५ ॥
अन्वयः- हे सखे ! प्रथमोदितप्रमितयः पट्टाः गव्यूतिमात्रे स्थिताः तेषां आन-
यनाय चेत् शकटिनां भाटकं द्रम्माष्टकं भवति तर्हि ये अन्ये माने चतुर्वर्जिताः
तदनन्तरं निगदिताः तेषां गव्यूतिषट्के का भाटकमितिः भवति इति वद ? ॥५॥
अर्थः- हे मित्र ! जो पहले उदाहरणमें पट्टे कहे हैं. मोटे १२ अंगुल, चौडे १६
अंगुल, लम्बे १४ अंगुल ऐसे तीस पटेले दो कोशपर रक्खे हैं उनके लानेमें यदि
गाडियोंका भाडा आठ ८ द्रम्म होता है, तौ जो उनके बाद चार ४ अंगुल कमके
पट्टे कहे हैं. अर्थात् ८ आठ अंगुल मोटे १२ बारह अंगुल चौडे १० दश अंगुल लम्बे
१४ चौदह पट्टोंके बारह १२ कोश लानेमें क्या भाडा होगा? सो कहो ॥ ५ ॥
न्यासः-- १२ | ८
१६ | १२
१४ | १० लब्धा भाटके द्रम्माः ८
३० | १४ \t\t\t १२ | ८
१ | ६ \t\t\t १६ | १२
८ | ० \t\t\t १४ | १०
\t\t\t\t ३० | १४
फैलाव-इस उदाहरणमें प्रश्न करनेवालेके कहनेके अनुसार \t २ | १२
न्यास हुआ. उपरोक्त रीतिके अनुसार हर नहीं है केवल फल \t ८ | ०
१२ ८
पलटा करनेसे न्यास १६ १२ हुआ.
१४ १०
३० १४
२ ३०
१२
( बहुत राशियोंका घात ) ८ ( थोडी राशियोंका घात. )