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सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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पृष्ठ 77

गुणकर्मप्रकारः । ( ६१ )
न्यासः-मूलगुणम् ७/२ दृष्टस्यास्य २ गुणार्द्धकृत्या ४९/१६
युक्तस्य मूलम् ९/४ गुणाद्धेन ७/४ युतम् १६/४ वर्गीकृतम्
जातं हंसकुलमानम् १६ ॥
फैलाव-उपरोक्त नियमानुसार मूलगुण ७/२ का आधा किया तब ७/४ ऐसा रूप
हुआ. इसका वर्ग किया तब ४९/१६ ऐसा हुआ. इसको दृष्ट राशि दो २ में जोडा तब
४९/१६ + २/१ = ४९/१६ + ३२/१६ = ८१/१६ ऐसा रूप हुआ. इसका मूल लिया तब ९/४ ऐसा रूप
हुआ. इसमें मूलगुण ७/२ का आधा ७/४ को जोडा ९/४ + ७/४ तब यहाँ समच्छेद है
इसलिये १६/४ ऐसा रूप हुआ. वर्ग किया तब २५६/१६ ऐसा हुआ. तब अंशमें हरका
भाग देकर राशिको शोधा तो सोलह १६ लब्धि हुआ. यही हंसोंके कुलका प्रमाण है॥
अथ मूलयुते दृष्टे चोदाहरणम्-
अब गुणमूलयुत दृष्ट राशिका उदाहरण दिखाते हैं-
स्वपदैर्नवभिर्युक्तं स्याच्चत्वारिंशताधिकम् ॥
शतद्वादशकं विद्वन्कः स राशिर्निगद्यताम् ॥ २ ॥
अन्वयः-हे विद्वन ! यः नवभिः स्वपदैः युक्तं चत्वारिंशताधिकं शतद्वादशकं स्यात्
सः राशिः कः इति निगद्यताम् ॥ २ ॥
अर्थः-हे विद्वन्! जो राशि अपने नौ चरणों करके युक्त बारहसौ चालीस १२४०
है वह राशि कौन होगा सो कहो ॥ २ ॥
न्यासः-मूलगुणम् ९ दृश्यम् १२४० गुणार्द्ध ९/२ मस्य
कृत्या ८१/४ युक्तं जातम् ५०४१/४ अस्य मूलम् ७१/२ गुणाद्धेन
९/२ अत्र विहीनम् ६२/२ वर्गीकृतम् ३८४४/४ छेदेन हृते जातो
राशिः ९६१ ॥
फैलाव- पूर्वोक्त सूत्रानुसार मूलगुण ९ नौका आधा ९/२ का वर्ग किया तब ८१/४
ऐसा रूप हुआ. इसको दृष्ट १२४० बारहसौ चालीसमें जोडा तब ८१/४ + १२४०/१ =
८१/४ + ४९६०/४ = ५०४१/४ ऐसा रूप हुआ. इसका वर्गमूल लिया तब ७१/२ ऐसा रूप हुआ.
इसको गुणार्द्ध ९/२ से हीन ७१/२ - ९/२ किया तब ६२/२ ऐसा हुआ. ( यहाँ हीन इस
कारण किया है कि, मूलगुणयुक्त करना कहा है. ) फिर इस निष्पन्न राशिका वर्ग
किया तब ३८४४/४ ऐसा रूप हुआ फिर अंशमें हरका भाग दिया तब ९६१ यह
निष्पन्न राशि हुआ. यही अपने नव पादोंसे युक्त १२४० होता है ॥