सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 268 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 56

( ४० ) । लीलावती ।
फैलाव-० शून्यको उपरोक्त रीतिके अनुसार ५ पाँचसे जोड दिया तब पाँच ही
होता है और ० शून्यका वर्ग किया तब शून्य ही होता है तथा ० शून्य का वर्ग-
मूल लिया तब भी शून्य ही होता है और ० शून्यका घन तथा घनमूल लेनेसे भी ०
शून्य ही होता है.
पाँच ५ को शून्य से गुणा करने से उपरोक्त रीति के अनुसार ० शून्य ही
होता है ॥
१० दशमें ० शून्य का भाग देनेसे उपरोक्त नियमानुसार १०/० दशके नीचे
शून्य हर हो जाता है.
यद्यपि विलोमकी रीति आगे कहेंगे परन्तु इस उदाहरणमें काम
पडता है इस कारण उसका विषय कहे देते हैं. अर्थात् यदि विलोम विधि करनी
हो, तो भाजकको गुणक कल्पना करे और गुणकको भाजक कल्पना करे, वर्गको
वर्गमूल माने और वर्गमूलको वर्ग माने, घनको घनमूल माने, घनमूलको
घन माने, जहाँ जो जोडना हो उसको घटावे और जो घटानेका हो
उसको जोडे. यह सब क्रिया प्रश्न करनेवालेकी कही हुई दृश्य राशिमें करे
तब मूलराशि मालूम हो जाता है और अपना अंश अधिक वा हीन हो
तो अधिक होने पर अंशको हरमें घटाय दे और यदि हीन हो तो अंशको हरमें
जोड दे शेष विधि पूर्वोक्त करे. इसी रीतिके अनुसार गुणकको भाजक,
धनको ऋण, गुणकको भाजक, भाजकको गुणक कल्पना किया फिर दृश्य राशिमें
यह विधि करी. अर्थात् ६३ को० शून्य से गुणा ( कल्पना )
किया तब पूर्वोक्त रीतिके अनुसार यद्यपि शून्य गुणक ० भाजक
गुणन फल होता है तथापि उसी रीतिके अनुसार युक्त १ अन्तर
विधि करनेको शेष है इस कारण दृश्य राशिको गुणक ३ भाजक
चिन्तना किया ६३x० फिर तीन ३ का भाग दिया भाजक ० गुणक
तब २१x० ऐसा रूप हुआ. अब यहाँ अपना अंश दृश्य ६३
६३x०
घटाना है इस कारण अंश २ दोको हर १ में जोड ३ ) ६३ ( २१x०
दिया तब ३ तीन हुए. इनका राशि २१ में भाग ६ ७
लिया तब ७ सात लब्धि हुए इनको २१ में ३ १४-०
घटाया तब १४x० ऐसा रूप हुआ अब यहाँ शून्य ० का ३ ०
भाग देना है और शून्यका गुणा भी प्राप्त चला आता ० १४ अज्ञा-
है इस कारण शून्यपरिकर्म्मके सूत्रके अनुसार शून्य त राशि,
गुणक होने पर शून्यका भाग प्राप्त है इस कारण राशि जैसाका तैसा रह गया
१४ चौदह यही अज्ञात राशि है ॥