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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 268 में से

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भागानुबन्ध-भागापवाहप्रकारः। ( ३३ )
दूसरे प्रश्नका फैलाव–जो हीन (ऋण) किया जाता है उसके शिरपर बिंदुरूप
एक चिह्न दिया जाता है. यहां जो जो भाग हीन करना है उसके शिरपर चिह्न दिया।
न्यासः | फिर उपरोक्त नियमानुसार तलके हर ७ सातसे ऊपरके हर ३ तीनको
२ | गुणा किया तब २१ इक्किस हुआ उसको ऊपरके हरके स्थानमें लिखा
-- | और यहाँ नीचेका अंश घटाना है इस कारण नीचेके हर ७ सातमें
३ | अपना अंश तीनको हीन किया तब ४ चार शेष रहा उससे ऊपरके

१̇ | अंशको गुणा तब ४/२१ ऐसा रूप हुआ फिर उसी रीतिसे नीचेके हर ८
-- | आठसे ऊपरके । २१ । हरको गुणा किया तब १६८ एक सौ अडसठ हुआ
८
-- | उसको ऊपरके हरके स्थानमें लिखा और यहां भी नीचेका भाग १̇/८ हीन
३̇

७
करना है इस कारण नीचेके हर ८ आठमें अपने अंश १ एकको घटाया तब ७ सात
शेष रहा. इससे ऊपरके अंशको गुणा किया तब २८/१६८ ऐसा रूप हुआ. यहाँ ५६ का
अपवर्तन देनेसे १/६ यह उत्तर हुआ ॥
तीसरे प्रश्नका फैलाव-यहाँ उपरोक्त रीतिके अनुसार नीचेके हर ७ सातसे
ऊपरके हर २ को गुणा किया तब १४ चौदह हुआ. उसको ऊपरके हरके स्थानमें
न्यासः | लिखा और यहां नीचेका भाग ९/७ युक्त करना है. इस कारण नीचेके
१ | हर ७ सातमें अपना अंश ९ नौ जोडा तब १६ सोलह हुआ. इससे
-- | ऊपरके अंश १ एकका गुणा किया तब १६/१४ ऐसा रूप हुआ फिर उसी
२ | रीतिसे नीचेके हर ८ आठसे । १४ । ऊपरके हर १४ चौदहको गुणा किया

१̇ | तब ११२ ऐसा रूप हुआ. इस राशिको ऊपरके हरके स्थानमें लिखा
-- | और यहां नीचेका भाग १̇/८ हीन करना है इस कारण नीचेके हर ८ आठमें
८

९

७
अपने अंश १ एकको हीन किया तब ७ रहा. इससे ऊपरके अंशको गुणा किया
तब ११२/११२ ऐसा रूप हुआ. यहाँ एक सौ बारह ११२ का परिवर्तन दिया तब १/१
यह उत्तर हुआ ॥
इति भागानुबन्धभागापवाहौ ॥
इति जातिचतुष्टयम्.
३