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सर्वकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 114, कुल 268 में से

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पृष्ठ 114

( ९८ ) लीलावती ।
अर्थ:-योगजवर्ण ( युतिजातवर्ण ) को बड़ी संख्यावाले वर्णमें घटावै और
युतिजातवर्णमें थोड़ी संख्यावाले वर्णको घटावै, फिर जो दोनोंमें शेष रहें उनको
अलग २ कोई इष्ट कल्पना कर उससे गुण दे तब क्रमसे सुवर्णकी तोल मालूम
होती है ॥ २९ ॥
उदाहरणम्-
हाटकगुटिके षोडशदशवर्णे तद्युतौ सखे जातम् ॥
द्वादशवर्णसुवर्णं ब्रूहि तयोः स्वर्णमाने मे ॥ १ ॥
अन्वयः-हे सखे ! षोडशदशवर्णे हाटकगुटिके स्तः तद्युतौ द्वादशवर्णं जातम्
तर्हि तयोः स्वर्णमाने मे ब्रूहि ! ॥ १ ॥
अर्थ:-हे मित्र ! १६ सोलह और १० दशके वर्ण ( भाव ) की सुवर्णकी दो
गोली हैं और उनको मिलाकर गलानेसे बारह १२ के वर्णका सुवर्ण होता है तो कहो
वह दोनों सुवर्णकी गोली कितनी २ तोलकी हैं ? ॥ १ ॥
न्यासः- १६/० १०/० साध्यो वर्णः १२
कल्पितमिष्टं १ लब्धे सुवर्णमाने १६/२ १०/४
अथवा द्विकेनेष्टेन १६/४ १०/८
अर्द्धगुणितेन वा १६/१ १०/२
फैलाव-यहाँ साध्य ( युतिजातवर्ण. ) बारह १२ को बड़ी संख्यावाले वर्ण १६
सोलहमें घटाया तब ३ चार शेष रहा और युतिजातवर्ण १२ में थोड़ी संख्यावाले
वर्ण १० को घटाया तब २ शेष रहे. इन दोनों शेष राशियों ४, २ को कल्पना किये हुये
इष्ट १ एकसे गुणा किया तब क्रमसे थोड़ी और बहुत संख्यावाले वर्णके सुवर्णके
तोल ४, २ हुई. अर्थात् दशवर्ण वालेकी तोल ४ चार सोलह १६ वर्णवालेकी तोल
२ दो हुई. क्योंकि ऐसा होनेपर सुवर्णके वर्ण और तोलके घातयोग ७२ बहत्तरमें
तोलके योग ६छ का भाग देने से लब्धि १२ बारह हुई वही युतिजातवर्ण मिलता
है. इसी प्रकार जब २ दोको इष्ट माना तब सोलह १६ वर्णवालेकी तोल चार ४और
दशवर्णवालेकी आठ ८होती है और १/२ आधेको इष्ट माना तब सोलह वर्णवालेकी
तोल १ एक और दश १० वर्णवालेकी तोल २ दो होती है इस प्रकार जैसा इष्ट
मानोगे वैसी ही तोल मिलेगी ॥