लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१० भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम्
अब ईकारान्त स्त्रीलिङ्गो मे सब से विलक्षण स्त्रीशब्द का वर्णन करते हैं।
[लघु०] स्त्री। हे स्त्रि '॥
व्याख्या—स्त्यै शब्द-सङ्घातयोः (भ्वा० प०) धातु से स्त्यायतेर्ड्रट् (उणा०
६०५) सूत्र द्वारा ड्रट् प्रत्यय हो कर अनुबन्धलोप, टिलोप, लोपो व्योर्बलि (४२६)
से यकारलोप, टिड्ढाणञ्० (१२४७) से ङीप् प्रत्यय और यस्येति च (२३६) से
भसञ्ज्ञक अकार का लोप करने से 'स्त्री' शब्द निष्पन्न होता है। स्त्रीशब्द ङ्यन्त है
अतः 'स्त्री+सु' यहा हल्ङ्याब्भ्य० (१७६) द्वारा अपृक्त सकार का लोप हो जाता
है—स्त्री।
सम्बुद्धि में यू स्त्र्याख्यौ नदी (१६४) सूत्र द्वारा स्त्रीशब्द की नदीसञ्ज्ञा हो
जाती है। तब अम्बार्थनद्योर्ह्रस्वः (१६५) सूत्र से ह्रस्व और एङ्घ्रस्वात् सम्बुद्धेः
(१३४) सूत्र से सकार का लोप हो कर 'हे स्त्रि' प्रयोग सिद्ध होता है।
'स्त्री+औ' यहा धातु का ईकार न होने से इयङ् प्राप्त नही होता। पूर्व-
सवर्णदीर्घ का भी दीर्घाज्जसि च (१६२) से निषेध हो जाता है। तब इको यणचि
(१५) मे यण् प्राप्त होता है। इस पर अग्रिमसूत्र प्रवृत्त होता है—
[लघु०] विधि-सूत्रम्—(२२७) स्त्रियाः ।६।४।७६॥
अस्येयङ् स्याद् अजादौ प्रत्यये परे। स्त्रियौ। स्त्रियः॥
अर्थ.—अजादि प्रत्यय परे होने पर स्त्रीशब्द के ईकार को इयङ् आदेश हो।
व्याख्या—स्त्रियाः ।६।१। इयङ् ।१।१। अचि ।७।१। (अचि श्नुधातु० से)।
'प्रत्यये' का अध्याहार कर यस्मिन् विधिस्तदादावल्ग्रहणे द्वारा तदादिविधि हो कर
'अजादौ प्रत्यये' बन जाता है। अर्थ —(अचि=अजादौ) अजादि (प्रत्यये) प्रत्यय परे
होने पर (स्त्रिया ) स्त्रीशब्द के स्थान पर (इयङ्) इयङ् आदेश हो। अलोऽन्त्य-
परिभाषा से स्त्रीशब्द के अन्त्य ईकार के स्थान पर इयङ् आदेश होगा।
'स्त्री+औ' यहा 'औ' यह अजादि प्रत्यय परे होने से प्रकृतसूत्र द्वारा इयङ्
आदेश होकर—'स्त्रियौ' रूप बना।
'स्त्री+अस्' (जस्) यहां भी इयङ् हो कर—'स्त्रियः' रूप बनता है।
'स्त्री+अम्' यहा अमि पूर्वः (१३५) का बाध कर प्रकृत-सूत्र से नित्य इयङ्
प्राप्त होता है; इस पर अग्रिमसूत्र से विकल्प करते हैं—
[लघु०] विधि-सूत्रम्—(२२८) वाऽम्शसोः ।६।४।८०॥
अमि शसि च स्त्रिया इयङ् वा स्यात्। स्त्रियम्, स्त्रीम्। स्त्रियः,
'स्त्रीः। स्त्रिया। स्त्रियै। स्त्रियाः २। परत्वान्नुट्—स्त्रीणाम्। स्त्रीषु ॥
अर्थः—अम् वा शस् परे होने पर स्त्रीशब्द को विकल्प कर के इयङ् हो।
व्याख्या—वा इत्यव्ययपदम्। अम्शसोः ।७।२। स्त्रियाः ।६।१। (स्त्रियाः से)।
इयङ् ।१।१। (अचि श्नु० से) । अर्थः—(अम्शसो ) अम् अथवा शस् परे होने पर
(स्त्रियाः) स्त्रीशब्द के स्थान पर (वा) विकल्प कर के (इयङ्) इयङ् आदेश होता
है। यह पूर्वसूत्र का बाधक है।