लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअजन्त-स्त्रीलिङ्ग-प्रकरणम् ३०७
शब्द — अर्थ | शब्द — अर्थ | शब्द — अर्थ
अश्मरी* = पथरी रोग | कुटुम्बिनी = भार्या | दूती = संदेशहरी
आनुपूर्वी* = क्रम | कुमारी* = कुंवारी लड़की | देवकी = श्रीकृष्ण-माता
आमलकी = आँवला | केतकी = केवड़ा (क्षुप) | देवी = दुर्गा, देवपत्नी
इङ्गुदी = गोंदी | कोकी = चकवी | दैनन्दिनी = डायरी
इन्द्राणी = इन्द्रपत्नी | कौमुदी = चान्दनी | द्रौपदी = द्रुपद-कन्या
उज्जयिनी = उज्जैन नगर | कौमोदकी = विष्णुकी गदा | धमनी = नाड़ी, शिरा
उदीची = उत्तर दिशा | कौशाम्बी = एक नगर | धरित्री* = पृथ्वी
उर्वशी = एक अप्सरा | क्षत्रियाणी = क्षत्रियस्त्री | नगरी* = नगर
उर्वी* = पृथ्वी | गर्दभी = गधी | नटी = नट की स्त्री
ऋतुमती = रजस्वला | गर्भिणी = गर्भवती | नदी = नदी
एकादशी = एकादशी | गायत्री* = एक छन्द | नलिनी = कमलिनी
कटी = कमर | गाली = अपशब्द | नागवल्ली = पान की वेल
कठिनी = खड़िया मिट्टी | गुटी = गोली | नाडी = शिरा
कदली = केले का पेड़ | गुडूची = गिलोय | नारी* = स्त्री
कवरी* = वेणी | गुर्वी* = भारी | निशीथिनी = रात्रि
कमठी = कछुई | गृध्रसी = एक रोग | पञ्चवटी = एक स्थान
करिणी = हथिनी | गृहिणी = भार्या | पतिवत्नी = सधवा
कर्तनी = कैंची | गोष्ठी = सभा | पत्नी = भार्या
कस्तूरी* = कस्तूरी | गोस्तनी = द्राक्षा विशेष | पदवी = मार्ग, पद
काकली = सूक्ष्ममधुरध्वनि | घृतचौरी* = कचौरी | पद्मिनी = कमल-समूह
काकिणी = कौड़ी | छागी = बकरी | परिपाटी = सिलसिला
काकी = कौवी | जगती = पृथ्वी | पाञ्चाली = द्रौपदी
कादम्बरी* = मदिरा | जननी = माता | पार्वती = दुर्गा
कादम्बिनी = मेघ-माला | ज्योत्स्नी = चान्दनी रात | पितामही = दादी
कामिनी = स्त्री | टिप्पणी = नोट | पिप्पली = पीपर
कामुकी = कामुक स्त्री | तटिनी = नदी | पुत्री* = बेटी
कालिन्दी = यमुना नदी | तपस्विनी = तपस्या वाली | पुरन्ध्री* = पति-पुत्रवती
काली = देवी-विशेष | तमी = अन्धेरी रात | पुरी* = नगरी
कावेरी* = एक नदी | तरङ्गिणी = नदी | पुंश्चली = व्यभिचारिणी
काशी = बनारस | तरुणी = जवान स्त्री | पुष्करिणी = हथिनी
किङ्किणी = घुंघरू | तामसी = तमोगुणवाली | पुष्पवती = रजस्वला
किंवदन्ती = अफ़वाह | तिरस्करिणी = परदा | पृथिवी = भूमि
कुटी = झोंपड़ी | त्रयी* = ऋग्यजुःसाम | पृथ्वी = भूमि
कुट्टनी = दलाल स्त्री | दासी = नौकरानी | पेषणी = पेषण-शिला