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लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

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पृष्ठ 317

३०२ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम्
शब्द—अर्थ | शब्द—अर्थ | शब्द—अर्थ
आलि = पङ्क्ति | तिथि = तारीख | भुशुण्डि = बन्दूक
आवलि = पङ्क्ति | दीधिति = किरण | भूति = कल्याण
आवृत्ति = दुहराना | दृष्टि = नज़र | भूमि = पृथ्वी
आहति = आघात | द्युति = चमक | भृति = मज़दूरी
आहुति = आहुति | धूलि = धूल | भेरि* = नगारा
इष्टि = यज्ञ | धृति = धैर्य | भ्रान्ति = भ्रम
उक्ति = वचन | निकृति = छल | मुक्ति = मोक्ष
उन्नति = उन्नति | नियति = भाग्य | मूर्त्ति = प्रतिमा
उपकृति = उपकार | निराकृति = खण्डन | यष्टि = छड़ी
उपलब्धि = प्राप्ति, ज्ञान | नीति = नीति | युक्ति = उपाय
ओषधि = जड़ी-बूटी | नुति = स्तुति | युवति = जवान स्त्री
कटि = कमर | पङ्क्ति = कतार | योनि = उत्पत्तिस्थान
कण्डूति = खुजली | पद्धति = मार्ग | रजनि = रात्रि
कान्ति = सौन्दर्य | पीति = पीना | राजनीति = राजनीति
कीर्ति = यश | प्रकृति = स्वभाव | रीति = तरीका, रिवाज
धृति = धैर्य | प्रतिकृति = छाया, सादृश्य | रुचि = अनुराग
कृत्ति = चमड़ा | प्रतिपत्ति = ज्ञान, प्राप्ति | रूढ़ि = प्रसिद्धि
कृषि* = खेती | प्रतीति = अनुभव | लिपि = वर्णमाला
कोटि¹ = कोना, करोड़ | प्रत्यासत्ति = समीपता | वमि = वमन
खनि = खान | प्रत्युक्ति = उत्तर | वल्लि = लता
ख्याति = प्रसिद्धि | प्रशस्ति = प्रशंसा | वसति = वास, घर
गति = चाल, गमन | प्रसुप्ति = निद्रा | वस्ति = मूत्राशय
गीति = गान | प्रसूति = प्रसव, सन्तान | वान्ति = वमन
गुप्ति = छिपाना | प्रसृति = प्रसार, वृद्धि | विकृति = विकार
ग्लानि = अवसाद | प्राप्ति = पाना | विगीति = निन्दा
च्युति = गिरना | प्रीति = प्रेम | विज्ञप्ति = प्रार्थना
छर्दि = वमन | प्लुति = छलाङ्ग | विधुति = कम्पन
छवि = कान्ति, चमक | बुद्धि = बुद्धि | विनति = नम्रता
जग्धि = सहभोज | भक्ति = श्रद्धा | विपत्ति = आपत्ति
जनि = उत्पत्ति | भणिति = कथन | विरति = हटना
जाति = जाति | भित्ति = दीवार | विवृति = व्याख्या
तति = विस्तार | भीति = डर | विशुद्धि = विशेष शुद्धि
तमि = अन्धेरी रात | भुक्ति = भोजन, खाना | विस्मृति = भूलना
१. करोड़ अर्थ में 'कोटि' शब्द एकवचनान्त होता है।