लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअजन्त-पुल्लिङ्ग-प्रकरणम् १८६
स्तम्भ १
शब्द = अर्थ
जनक = पिता
तनय = पुत्र
देवर* = देवर
दौहित्र* = दोहता
धव = पति
पितामह = दादा
पितृव्य* = चाचा
पौत्र* = पोता
प्रपितामह = परदादा
प्रपौत्र* = परपोता
भागिनेय = भांजा
भ्रातृव्य* = भतीजा, शत्रु
भ्रात्रीय* = भतीजा -
मातामह = नाना
मातुल = मामा
मातुलेय = मामे का पुत्र
श्याल = साला
श्वशुर* = ससुर
सोदर* = सगा भाई
स्वस्रीय* = भांजा
[अथ खाद्यान्नादिवाचकाः]
अपूप = पूआ
आम्र* = आम का वृक्ष
कुलत्थ = कुलथी
कोविदार* = कचनार
गुड = गुड़
गृञ्जन = गाजर
गोधूम = गेहूं
चणक = चना
चम्पक = चम्पावृक्ष
तिल = तिल
दाडिम = अनारवृक्ष
नारिकेल = नारियल पेड़
निम्ब = नीम (पेड़)
स्तम्भ २
शब्द = अर्थ
पटोल = परवल
माष* = उड़द
मुद्ग = मूंग
सर्षप* = सरसों
संयाव = हलुआ
[अथ मनुष्यवर्गस्थ-शब्दाः]
अकिञ्चन = निर्धन
अज्ञ = मूर्ख
अध्यापक = अध्यापक
अध्वनीन = मुसाफिर
अन्ध = अन्धा
अर्चक = पुजारी
अशिक्षित = अनपढ़
अश्वारोह* = घुड़सवार
कर्णेजप = चुगलखोर
काण = काना
कृतघ्न = अकृतज्ञ
कृतज्ञ = शुक्रगुजार
कृपण = कंजूस
केशव = श्रीकृष्ण
कोविद = पण्डित
क्षत्रिय* = क्षत्रिय
खल = दुष्ट
गर्धन = लोभी
गुप्तचर* = दूत
घस्मर* = पेटू
चिकित्सक = वैद्य
चिरक्रिय* = सुस्त
जागरूक* = सावधान
जिह्म = कुटिल
तस्कर* = चोर
तूष्णीक = चुप
दर्शक = दर्शक
दानव = दैत्य
स्तम्भ ३
शब्द = अर्थ
दुर्विनीत = अनम्र
देव = देवता
धनिक = धनी
नट = नटवा
नर्मद = मसखरा
नापित = नाई
नाविक = मल्लाह
निशाचर* = राक्षस
निःसङ्ग = बेहोश
निःस्व = निर्धन
नृप* = राजा
न्यायाधीश = जज
पथिक = मुसाफिर
परिचारक* = सेवक
पाचक = रसोइया
पुरन्दर* = इन्द्र
वधिर* = वहरा
भारक* = कुली
मन्मथ = कामदेव
मल्ल = पहलवान
मायिक = मायावी
मितम्पच = कञ्जूस
याचक = भिक्षुक
याष्टीक = लाठीधारी
रथिक = रथी
रुग्ण = रोगी
वक्र* = टेढ़ा
विप्र* = ब्राह्मण
वैश्य = वैश्य
वैहासिक = मसखरा
शाक्तीक = शक्तिधारी
शूद्र* = शूद्र
सतीर्थ्य = सहपाठी
स्तावक = स्तुतिकर्ता