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लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 203, कुल 633 में से

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पृष्ठ 203

१८८ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम्
तथापि आजकल यह सब विभक्तियों के अन्त में प्रचलित है। यहां हम ने लौकिकक्रम
का अनुसरण किया है।
इस प्रकार सब अकारान्त पुंल्लिङ्गों के उच्चारण होते हैं। जिन में कुछ
विशेषता है उन का कथन आगे मूल में स्वयं ग्रन्थकार करेंगे। हम यहां रामवत् कुछ
उपयोगी शब्दों का अर्थ सहित सङ्ग्रह दे रहे हैं। जिन शब्दों के आगे '' इस प्रकार
का चिह्न है उन में णत्वविधि जान लेनी चाहिये।
[अथ पशुपक्षिकीटादयः] | शब्द = अर्थ | शब्द = अर्थ
शब्द = अर्थ | चरणायुध = मुर्गा | मार्जार
= बिल्ला
अश्व = घोड़ा | चाष* = नीलकण्ठ | मूषिक* = चूहा
उल्लूक = उल्लू | चिल्ल = चील | मृग* = हरिण
उष्ट्र* = ऊँट | छाग = बकरा | मृगादन = चीता
कपोत = कबूतर | ताम्रचूड = मुर्गा | मेष* = मेढ़ा
काक = कौआ | तुरङ्ग* = घोड़ा | वक = बगुला
कीट = कीटा | दिवान्ध = उल्लू | वराह* = सूअर
कीर* = तोता | द्विरद = हाथी | वर्तक = बटेर
कीश = वानर | ध्वाङ्क्ष* = कौआ | वानर* = बन्दर
कुक्कुट = मुर्गा | नकुल = नेवला | वायस = कौआ
कुक्कुर* = कुत्ता | नक्र* = नाका | वृक* = भेड़िया
कुञ्जर* = हाथी | पारावत = कबूतर | वृश्चिक = बिच्छू
कुरङ्ग* = हरिण | पिक = कोयल | वृषभ* = बैल
कूर्म* = कछुआ | बर्हिण = मोर | शलभ = पतङ्ग
कृकलास = गिरगिट | भालुक = रीछ | शशक = खरगोश
कोक = चकवा | भृङ्ग* = भ्रमर | शाखामृग* = बन्दर
कोल = सूअर | भेक = मेढक | शुक = तोता
कौशिक = उल्लू | भ्रमर* = भौंरा | शृगाल = गीदड़
खग = पक्षी | मकर* = मगरमच्छ | श्येन = बाज
खद्योत = जुगनू | मण्डूक = मेढक | षट्पद = भ्रमर
खर* = गधा | मत्कुण = खटमल | सर्प* = सांप
गज = हाथी | मत्स्य = मच्छ | सारङ्ग* = पपीहा
गण्डक = गण्डा | मधुप = भौंरा | सारमेय* = कुत्ता
गर्दभ = गधा | मयूर* = मोर | हरिण = मृग
गृध्र* = गीध | मर्कट = बन्दर | [अथ सम्बन्धवाचकाः]
घोटक = घोड़ा | मशक = मच्छर | अग्रज = बड़ा भाई
चकोर* = चकोर | महिष* = भैंसा | आवुत्त = बहनोई