लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्याम्
होता है कि जहां अच् के स्थान पर सन्धि अर्थात् संयोगजन्य वर्णविकार करें चाहे उस
का निमित्त अच् या हल् जो भी हो वहां 'अच्सन्धि' और जहां हल् के स्थान पर सन्धि
अर्थात् संयोगजन्य वर्णविकार करें चाहे उस का निमित्त अच् या हल् जो भी हो वहां
'हल्सन्धि' होती है । [ अचा स्थाने सन्धि = अच्सन्धि , हला स्थाने सन्धि =
हल्सन्धि ] । अच्सन्धि में झलां जश् झशि (१६) आदि सूत्र प्रसङ्ग वश लिये गये हैं ।
इसी प्रकार हल्सन्धि म विसर्जनीयस्य स (६६), कुप्वो ᳵकᳵपौ च (६८) प्रभृति
विसर्गसन्धि के सूत्र तथा कुछ अन्य भी प्रसङ्ग वश लिये गये समझने चाहियें ।
अभ्यास (२३)
(१) निम्नलिखित प्रयोगों में सूत्रसमन्वय करते हुए सन्धिविच्छेद करें—
१ इच्छति । २ द्यूतच्छलेन । ३ कुटीच्छन्ना । ४ दन्तच्छद । ५
असिच्छिन्न । ६ मङ्गलच्छाय । ७ रथाच्छिन्नवा । ८ स्वच्छातप ।
६ वैदिकच्छन्दांसि । १० नवच्छिद्राणि । ११ गच्छति । १२
नूतनच्छात्र । १३ चिच्छेद । १४ गूढाच्छेद्योक्ति । १५ माच्छिद ।
१६ तीक्ष्णाच्छुरिका । १७ स्वच्छन्द । १८ यज्ञच्छाग । १६
गुच्छच्छेद । २० कुलटाच्छिन्ननासिका ।
(२) निम्नस्थ रूपों में सूत्रसमन्वयपूर्वक सन्धि करें—
१ आ+छिद्यते । २ कुमारी+छेत्स्यति । ३. पद+छेद । ४ भूपति
+छाया । ५ बाले+छिद्यते । ६ मधु+छन्दस् । ७ वनानि+
छित्त्वा । ८ मा स्म+छिद् । ६ भूधव+छेद । १० शीतला+
छाया । ११ य+छति । १२ इ+छा । १३ सन्ति+छिद्राणि ।
१४ मा+छित्था । १५ नो+छेद । १६ वि+छेद ।
(३) गच्छति, इच्छति—आदि में तुँक् करने पर जश्त्व, चत्त्वं होंगे या नहीं ?
(४) पदान्ताद्वा द्वारा विहित तुँक् किस का अवयव है ? स्पष्ट करें ।
(५) क्या 'महाविद्यालयछात्र ' प्रयोग शुद्ध है ?
(६) 'उच्छेद' में तुँक् (?) किस सूत्र से होगा ?
(७) यदि 'मूर्च्छा' शुद्ध है तो 'वाञ्छति' क्यों नहीं ? सहेतुक लिखें ।
(८) अच्सन्धि-हल्सन्धि शब्दों का विवेचन कर 'सन्धि' पर टिप्पण लिखें ।
इति भैमीव्याख्योपेतायां लघु-
सिद्धान्तकौमुद्यां हल्सन्धि-
प्रकरणं समाप्तम् ॥