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सर्वकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 268 में से

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पृष्ठ 106

( ८७ )
well-known proverbial saying and it means that
body is the chief means of performing the religious
duties, hence one should take greatest possible care
of it
CHANGE OF VOICE :-अपि क्रियार्थं समित्कुशेन सुलभेन
( भूयते ) ? अपि जलैः ते स्नानविधिक्षमैः ( भूयते ) ? अपि
( त्वया ) स्वशक्त्या तपसि प्रवृत्त्यते ? खलु शरीरेण आद्येन धर्म-
साधनेन ( भूयते ) ॥ ३३ ॥
HINDI TRANSLATION :-( यज्ञादि ) धार्मिक कृत्यों के
लिये समिधायें और कुश तो सरलता से प्राप्त हो जाते हैं ? पानी
तो तुम्हारे स्नान के लिये उपयुक्त है ? और अपनी सामर्थ्य के
अनुसार ही तप करती हो न ? क्योकि शरीर वास्तव में धार्मिक
कृत्यों के करने में मुख्य सहायक है ॥ ३३ ॥
ENGLISH TRANSLATION -'Are sacrificial sticks and
Kusha grass easily available for holy rites ? Is the water
suitable for thy bathing ? And, dost thou practise
austerities in accordance with thy strength ? For, the
body is the chief means of performing religious
duties ' 33
PURPORT IN SANSKRIT - ब्रह्मचारिवेषधारी शिवः पार्वती
तत्कुशलं तपःसहायकवस्तूनां सुलभतां प्रति च पृच्छति- ' किं
त्वया होमादिधार्मिककृत्यकरणार्थं यज्ञकाष्ठानि दर्भाश्च सुखेन
लभ्यन्ते ? इतस्ततः पर्वतनिर्झरेषु नदीषु च प्राप्यं जलं किं ते स्नान-
योग्यमस्ति ? किं त्वं स्वसामर्थ्यानुसारेणैव तपस्यामाचरसि न तु
शरीरमत्यन्तं पीडयित्वा, यतो देहो धर्माचरणे प्रधानसहाय-