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सर्वकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

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साधनमाला २५
जाय । नौ, सात या पाँच दीपकों की योजना कर अन्तस्तेज
को बहिस्तेज से मिलाते हुए अमितप्रभा वाले दीपकों को
तीन बार देवी के ऊपर घुमाकर कुलदीपकों को इस मन्त्र
से निवेदित करे—समस्त चक्रचक्रेशियुते ! देवि ! कुलात्मिके !
आरात्रिकामिदं देवि ! गृहाण मम सिद्धये ॥
अब शक्तिपूजा करे । स्वशक्ति या वीरशक्ति या विशेष
कर दीक्षिता शक्ति का, जो सुलक्षणा हो, देवता समझकर
गन्ध-पुष्पाक्षत से पूजन करे और उसे भोगपात्र दे ।
फिर कन्याओं और मनोहर स्त्रियों की देवता-बुद्धि से पूजा
करे और उनमें से प्रत्येक को अलग अलग पात्र दे । इसके
बाद निम्न मन्त्र पढ़कर समर्पण करे—ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
इतः पूर्वं प्राणबुद्धी देहधर्माधिकारजाग्रत्स्वप्नसुषुप्तिषु मनसा
वाचा कर्मणा हस्ताभ्यां पद्भ्यामुदरेण शिश्ना च यत्कृतं
यदुक्तं यत्कृतं तत्सर्वं गुरुदेव मत्समर्पितमस्तु स्वाहा ।
फिर यह प्रार्थना करे—
ज्ञानतोऽज्ञानतो वापि यन्मया क्रियते सदा ।
तव कृत्यमिदं सर्वमिति मातः ! क्षमस्व मे ॥
इस प्रकार प्रार्थना कर प्रधान देवता-स्वरूप में परिवारों
को समर्पित करे । इस प्रकार सावरणा देवी का ध्यान हृदय-
कमल में करे ।
इसके बाद कौलिकमोहिनी देवी उच्छिष्टमातङ्गी का ध्यान
करे । यथा—
वीणावाद्यविनोदवाद्यनिरतां नीलांशुकोल्लासिनीं ।
विम्बोष्ठीं नवयावकाद्र‍् चरणामाकीर्णकेशाननाम् ॥