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सर्वकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

पृष्ठ 39, कुल 84 में से

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सातवाँ उल्लास
बटुक और शक्ति-पूजन
देवी बोलीं—हे कुलेश ! बटुकादि को बलिप्रदान और
शक्ति के लक्षणों के सम्बन्ध में अब मुझे बताइए ।
ईश्वर ने कहा—हे देवि ! सुनो, जब तक बटुक को बलि
अर्पित नहीं की जाती, तब तक किसी देवता को तृप्ति नहीं
होती । अतः बटुकादि को उनके मन्त्र-विधान से गन्ध-पुष्प-
आसव और आमिष प्रदान कर देवता की प्रसन्नता को प्राप्त
करे ।
'ॐ ॐ ॐ देवीपुत्र बटुकनाथ कपिलजटाभारभासुर पिङ्गल
त्रिनेत्र ज्वालामुख इमां ०पूजां बलिं गृह्ण गृह्ण स्वाहा'—इस मन्त्र
से बटुक को बलि देकर यह प्रार्थना करे—
'बलिदानेन सन्तुष्टो वटुकः सर्वसिद्धिदः ।
शान्तिं करोतु मे नित्यं भूतवेतालसेवितः ।'
'ॐ ॐ ॐ सर्वयोगिनीभ्यः सर्वभूतेभ्यः सर्वभूताधिपाय
डाकिनीभ्यः शाकिनीभ्यः त्रैलोक्यविपद्वासिनीभ्य इमां
पूजां बलिं गृह्ण गृह्ण स्वाहा'—से योगिनियों को बलि देकर यह
प्रार्थना करे—
या काचित् योगिनी रौद्रा सौम्या सौम्यतरा यदि ।
खेचरी भूचरी व्योमचरी प्रीतास्तु मे सदा ॥
'ॐ ॐ ॐ सर्वभूतेभ्यः सर्वभूतपतिभ्यो हुँ फट्'—से
फा० ३