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सर्वकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

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२४ हिन्दी कुलार्णव
वह साक्षात् पर-शिव के समान होता है। सभी देवता उसे
नमस्कार करते हैं। जहाँ कहीं वह जाता है, उसे विजय, सम्मान
और गौरव प्राप्त होता है। इसी का नाम वज्रपञ्जरन्यास है।
देवताभाव की प्राप्ति के लिये इससे बढ़कर संसार में और कोई
साधन नहीं है, यह मैं सत्य कहता हूँ। ऊर्ध्वाम्नाय में प्रवेश,
पराप्रासाद का ध्यान और महाषोढा का ज्ञान यह थोड़ी
तपस्या का फल नहीं है। हे कुलेशानि ! यह संक्षेप में मैंने
कुछ महान्यासादि तुमसे कहा है। अब तुम क्या सुनना
चाहती हो ?