खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
पृष्ठ 471, कुल 610 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] आधार-लक्षण का खण्डन ४५३
संयोगित्वे सत्यधःस्थितत्वं तत्राधिकरणार्थ इति चेन्न। तस्मिन् सत्यप्यन्यत्र
चरणतलमिलितधूलीपटलादौ अधिकरणप्रतीत्यनुपपत्त्या, प्रत्युत चरणतले धूलीत्येव
प्रतीत्या आधारत्वप्रतीतौ व्यभिचारित्वेन प्रकृतेऽपि तथास्वीकारानुपपत्तेः ।
न सार्वत्रिकोऽयमाधारार्थः, किन्तु क्वाचित्को नानारूपाधारत्ववादिपक्ष
इति चेन्न। भवत्वन्यत्र अन्यस्याऽऽधारार्थत्वम्; तस्य त्वाधारार्थत्वं नोपपद्यते,
अनाधारप्रतीतिविषयेऽपि सत्त्वादित्युक्तेः।
आधेयापेक्षया महत्परिमाणत्वे सतीति चेन्न । करतलस्थिततूलराश्यादौ तद-
सम्भवात् , अन्यस्य च तत्राऽऽधारार्थस्य वक्तुमशक्यत्वात् ।
अधःशब्दार्थस्य च वक्तुमशक्यत्वात् ।
पतनाभिमुखदिगवस्थितत्वमिति चेन्न। पतनार्थस्य गमनाधिकस्याधःशब्दार्थ-
समर्थन—'संयोगी होकर जो अधःस्थित हो, वह आधार है' ऐसा कहेंगे ।
खण्डन—ऐसा लक्षण करने पर 'कुण्डे बदरम्' यहाँ निर्वाह होने पर भी चरणतल में
मिलित धूलीपटल में अव्याप्ति हो जायगी । 'धूलीपटले चरणतलम्' ऐसा व्यवहार
नहीं होता, इससे विपरीत 'चरणतले धूलिः' यही व्यवहार होता है। अतः यह
लक्षण युक्त नहीं है ।
खण्डन—आधार को नानारूप माननेवालों के पक्ष में यह आधार का लक्षण
सार्वत्रिक नहीं, किन्तु कादाचित्क ही है। प्रकृत में यही आधार पदार्थ हो ।
खंडन—भले ही अन्यत्र आधार का अन्य अर्थ हो, किन्तु वह आधार पद का
शक्यतावच्छेदक नहीं हो सकता । कारण वह अनाधारप्रतीति-विषय धूलीपटल आदि
में होने से अतिप्रसक्त है, यह हम कह ही चुके हैं।
समर्थन—'आधेय की अपेक्षा जो महत्परिमाण होकर अधःस्थित संयोगी हो, वह
आधार है' ऐसा कहेंगे । चरणतल-मिलित धूलि में महत्परिमाण न होने से अति-
व्याप्ति नहीं है । खण्डन—करतलस्थित तूल-राशि में अव्याप्ति हो जायगी; कारण तूल-
राशि की अपेक्षा करतल में महत्परिमाण नहीं है । फिर, तूल-राशि का करतल में अन्य
प्रकार का आधारत्व भी हो नहीं सकता ।
किञ्च—'अधःस्थितत्व'घटक अधःशब्दार्थ का भी आप निर्वचन नहीं कर
सकते ।
समर्थन—'पतन की अभिमुख दिशा में जो अवस्थित हो, वही अधःस्थित है ।'