खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८० सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम
ओमिति चेत्; तत्किमोमित्यभिधायैव निवृत्तो भवान् ? आकलितं किलास्माभिः
सामग्र्यपि करणमित्यत्र न श्रदधतः प्रणवपूर्विकां श्रुतिमेव काञ्चित्पठित्वा श्रद्धा-
पयिष्यति भवानस्मानिति ।
न सामग्री कारणम्, किन्तु तदेकदेशो नानाभूतः प्रत्येकं तथा । सामग्री तु
'यदनन्तरं कार्यं भवत्येव'इत्येतावन्मात्ररूपेति चेन्न । एतादृशस्य सामग्रीलक्षणस्य
करणेऽपि सत्त्वात् करणस्यापि सामग्रीत्वापातात्, क्रियाया विभागादौ विभागस्य
च संयोगनाशादिं प्रति तथात्वापत्तेः ।
यच्च प्रतिसामग्र्येकदेशं नियतप्राग्भावादि कारणलक्षणमिष्यते, तत्सामग्र्या-
मपीति कथं तदकारणता ?
प्राक्कालमन्तर्भाव्य सामग्री, तादृश्याश्च तस्याः प्राक्सत्त्वमेव नास्तीति चेन्न ।
तत एव प्राक्कालस्याकारणत्वात् कारणसामग्र्यां तदनिवेशात् ।
करणत्व का प्रसङ्ग हो जायगा । यदि आप 'ओम्' शब्द का उच्चारणकर सामग्री का
करणत्व स्वीकार करायें, तो क्या आप 'ओम्' कहकर ही कृतकृत्य हो गये ? हमने
तो यही समझा कि बिना किसी युक्ति के सामग्री को करण मानने में श्रद्धा न रखने-
वाले हम लोगो को आप प्रणवपूर्वक कोई श्रुतिवचन पढ़कर श्रद्धा करा देंगे ।
समर्थन—सामग्री कारण नहीं, बल्कि उसका एकदेश जो, कि समवायी,
असमवायी आदि अनेकविध है, कुठारादि प्रत्येक कारण है । जिसके अनन्तर
उसरकाल में कार्य अवश्य हो, वह सामग्री है । अतः सामग्री में क्रिया के
साथ अयोगव्यवच्छेद से युक्त कार्यकारणभावरूप सम्बन्ध न होने से
अतिव्याप्ति नहीं है । खण्डन--सामग्री का यह लक्षण करण में भी है, अतः करण
में सामग्री के लक्षण की अतिव्याप्ति हो जायगी । किञ्च—क्रिया विभाग की और
विभाग संयोग के नाश की सामग्री हो जायगा ।
किञ्च—नियतपूर्ववर्तित्वरूप जो कारणत्व-सामग्री के एकदेश में है, वह सामग्री
में भी है ही । अतः 'सामग्री कारण नहीं है' यह कथन भी उचित नहीं है ।
समर्थन—सामग्री में अन्तर्भूत प्राक्काल भी है और उसमें प्राक्सत्त्वरूप
कारणत्व नहीं है । अतः प्राक्कालघटित सामग्री में प्राक्सत्त्वरूप कारणत्व नहीं है ।
खण्डन—प्राक्काल में पूर्वक्षणवृत्तित्व का असत्त्व होने से वह कारण ही नहीं है।
अतः कारणसमूहरूप सामग्री में प्राक्काल का प्रवेश हो ही नहीं सकता ।