खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] द्वितीय करणत्व-लक्षण का खण्डन १७६
यद्विशिष्टमुपलक्षितं वा तत्करणमित्येवास्तु, सम्बन्धीत्येव वा तथा विवक्ष्यता-
मित्युकतमेव ।
अयमेवार्थः कयाऽपि कुसृष्ट्या सम्बन्धिपदसार्थकतामुपपाद्य यदि विव-
क्षितस्तदाप्युच्यते — कृत्तिकोदयक्रियायां रोहिण्यासत्तिरेवेवं करणं स्यात्, अनन्तर-
भाविनश्चतुर्दशस्य नक्षत्रस्योदयं प्रति पूर्वभाविचतुर्दशसङ्ख्यनक्षत्रास्तमयस्य च
करणत्वं स्यात् ।
न चैवमेव युक्तम् ; यौगपद्येन कारणत्वानुपपत्त्या कारकत्वस्य दुर्निरस्तत्वेन
करणत्वस्य सम्भावनाऽनारोहात् ।
न च तत्र सम्बन्ध एव नास्ति; व्याप्तेः स्वभावसम्बन्धात्मिकाया दुरपह्नवत्वात् ।
अथ कार्यकारणभावः सम्बन्धो विवक्षितः । न ; सामग्र्याः करणत्वापत्तेः ।
उपलक्षित हो, वह करण है,” अथवा “यावत्सत्त्व जो प्रधान छिदादि क्रिया का सम्बन्धी
हो, वह करण है” ऐसा ही लक्षण रहे, 'अयोगव्यवच्छेदेन' यह विशेषण व्यर्थ है ।
यदि कहो कि सम्बन्धी पद से सम्बन्ध-सामान्य विवक्षित है और अयोगव्यवच्छेद
पद से यावत्-कारक-सत्त्व विवक्षित है, अतः न पुनरुक्ति है और न विशेषण ही व्यर्थ
है, तो यह कल्पना उदक्षर होने से ( अक्षरार्थ न होनेसे ) कुत्सित है । किञ्च — ऐसा
निवेश करने पर भी कृत्तिकानक्षत्र की उदयरूप क्रिया में रोहिणी का सामीप्य भी
करण हो जायगा । किञ्च — उत्तरभावी चतुर्दश नक्षत्र के उदय के प्रति पूर्वभावी चतुर्दश
नक्षत्र का अस्तगमन भी करण हो जायगा ।
समर्थन — कृत्तिकानक्षत्र के उदय में रोहिणी का सामीप्य करण क्यों नहीं माना
जाय ? खण्डन — एक काल में होने से उसमें पूर्वकालवृत्तित्वरूप कारणत्व ही नहीं है,
अतः करणत्व की सम्भावना भी नहीं है ।
समर्थन — कृत्तिकोदय का रोहिणी के सामीप्य में सम्बन्ध नहीं है । अतः क्रिया
के साथ अयोगव्यवच्छेद से युक्त सम्बन्धरूप करणत्व लक्षण की अतिव्याप्ति नहीं है ।
खंडन — कृत्तिकोदय की रोहिण्यासत्ति ( रोहिणी के सामीप्य ) में स्वभाव ( स्वरूप )
सम्बन्धरूप व्याप्ति ही सम्बन्ध है । उसका अपह्नव नहीं हो सकता ।
समर्थन — क्रिया के साथ अयोगव्यवच्छेद से युक्त कार्यकारणभावरूप सम्बन्ध
जिसमें हो, वह करण है। कृत्तिकोदय का रोहिणी के सामीप्य में कार्यकारणभाव
नहीं है, अतः अतिव्याप्ति नहीं है। खण्डन — छिदादि प्रधान क्रिया के
साथ अयोगव्यवच्छेद से युक्त सम्बन्धी सामग्री भी है; अतः सामग्री में