काव्यमीमांसा (महाकवि राजशेखर - कवि-रहस्य एवं देश-विभाग सटीक)
Kavyamimamsa of Rajasekhara with Hindi Commentary
महाकवि राजशेखर / पं. केदारनाथ शर्मा द्वारा
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इत्थं० ७८ | एतद्यत् ३५
इत्युक्तवानुक्तिविशेषरम्यं मनः ५८ | एताम् १९, ४५
इत्युक्तदानुक्तिविशेषरम्यं रामा० ५८ | एताः ४५, ८२
इत्युद्गते ६९ | एवम् ३८
इ्लेषः १० | कण्ठ० २३
इदं कविभ्यः ४१ | कथमसौ न ७५
इदं भासाम् ९७ | कथमगौ मदनो ७५
इदं महाहास० ५१ | कपाले ७२
इदं हि ५२ | कपोले ९७
इयं सा २ | करभाः १०७
इह ५५ | करोति ३३
उच्चैस्तराम् १८ | कर्कन्धूनाम् १०३,
उच्यताम् ३२ | कर्कोटः ४३
उत्क्लेशम् ७१ | कर्णे १११
उत्खात० ८३ | कर्पूर० १०७
उत्पादकः ६२ | कलि० ३८
उदयति नवनीत० ७८ | कवित्वम् १५
उदयति पश्य ७४ | कवीनाम् ८२
उदरम् १८ | कवेः ५६
उदीच्य० १०४ | कश्चित् ९४
उद्दण्डोदर० ८४ | कस्त्वम् १४
उद्यानानाम् १०३ | काञ्च्याः ९६
उन्माद्यन्त्यम्बु० ४१ | कान्ते ६७
उपानयन्ती १०१ | कामं भवन्तु ८०
उपोष० २८ | कामं विशृणुते ३२
उभौ ४१ | कारयित्री १५
उमैकपादा० ७२ | कार्या० ५१
उषस्सु ९९ | काव्यकाव्याङ्ग० १३
ऊरुद्वन्द्वम् ६१ | काव्यमध्यो २७
ऊरुद्वयम् ६१ | काव्येन १५
ऋतु० १११ | काश्मीरी० ९७
एकम् ९५ | काष्ठा ९८
एकद्वित्र्यादि ११२ | किं करोति ५७
एकस्य १३ | किं चैते ७८
एकोऽर्थः ४८ | किमिह ६०
एणाः १०७ | किमीहः ३७
एतत्किम् १६ | कियता ६३
एतत्सुन्दरि ८५ | कियन्मात्रम् २४