काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)

काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)
Kavyalankara of Acharya Bhamaha with Commentary
आचार्य भामह (सम्पादक: पण्डित देवेन्द्रनाथ शर्मा) द्वारा
DevanagariHindipublished230 पृष्ठ
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स एकश्रेणि जयति or स एकश्रेणी जयति?
Wait, let's look at the letter: स एकश्रेणि जयति (wait, is it श्र or क्र?):
It has क with ् and र? Wait, क्रे or श्रे?
Wait, Bhamaha 4.29:
"स एकत्रैव जयति"? No.
Let's look at the letters:
स ए क श्रे णि (or क्रे?):
Wait, it is: स एकत्रेव? No, it has णि at the end: णि!
Wait, Bhamaha 4.29:
"स एकश्रेणी जयति"?
Wait, look at line 25:
स एकश्रेणि जयति 144
Wait, let's look at the glyph:
स (space) ए क श्रे णि (short i!) ज य ति.
Wait, is that क्रे or श्रे?
It's श्रे! Look at श्रेयसो in line 17: श्रे has the exact same loop and stroke: श्रे.
So स एकश्रेणि जयति.