कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
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कौशिकगृह्यसूत्रकी
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अध्याय ॥ १ ॥
कं. सूत्र पृष्ठ
१-१-३७ वेद तथा ब्राह्मण ग्रंथों से संस्कार, पाकयज्ञ, देवयज्ञ, १-३
पितृयज्ञादिक निकले हैं । पाकयज्ञ की परिभाषा, बैल के
चर्म पर बैठना ।
२-१-४१ उपकरणों को वेदी के पास रखने का नियम उनको यथा ४-७
नियम साफ करना, प्रोक्षण करने की रीति, हवन की विधि ।
३-१-२० इध्मों का आधान, अभिमन्त्रण, अभिषेचनादि, ब्रह्मा के ७-९
कर्त्तव्य राजकर्म, आभिचारिक कर्मों में विशेषता ।
४-१-१९ वेदी के किस भाग में कौन २ सी आहुतियां देनी । ९-११
अवदान की प्रक्रिया, आहुतियों की देवता, उनके नाम,
विभिन्न आपत्तियों के फल ।
५-१-१३ अमावास्या, पौर्णमासी को होम करने की रीति । ११-१३
६-१-३७ आज्य की अस्स्रुति द्वारा स्कन्न होम, अस्स्रुति होम, १३-१६
संस्थित होमादि, दर्श एवं पौर्णमास का व्याख्यान ।
७-१-२९ स्थालीपाक की विधि में अश्नामि या आशयति करको कहा १६-१८
गया है, वहाँ २ स्थालीपाक की विधि समझना । जुहोति
से घृत जानना । यह आहुति पदार्थ का विशेष नियम है ।
उदक से जलपात्र, अनुपदिष्ट की जगह आज्य काष्ठ अनुप-
दिष्ट होने से । भक्षयति से पुरोडाश, प्रयच्छति से मन्थ
एवं ओदन और उदक संस्कार कथन से जलपात्र समझना ।
८-१-३५ पुरस्तात् होम के निशा कर्मों के नियम, विधि कर्मों में १८-२०
जलक्रिया तीन २ करना, विभिन्न सूत्रों के विनियोग दशा
में नियम प्रयच्छाञ्च परशुं से कुश काटने का अस्त्र देना ।
कर्म, अभिचारकर्म इनकी सामग्रियों, वास्तोष्पतीय, मातृ-
नामादि की परिभाषा ।