कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
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अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ६९
दष्टः ॥७॥ पञ्चम्या वलीकपलालज्वालेन ॥८॥ षष्ठ्यार्त्नी-
ज्यापाशेन ॥६॥ द्वाभ्यां मधूद्वापान् पाययति ॥१०॥ नव-
म्या श्वाविट्पुरीषम् ॥११॥ त्रिःशुक्लया मांसं प्राशयति
॥१२॥ दशम्यालाबुनाचमयति ॥१३॥ एकादश्या नाभिं
बध्नाति ॥१४॥ मधुलावृषलिङ्गाभिः खलतुलपर्णी संक्षुद्य
मधुमन्थे पाययति ॥१५॥ उत्तराभिर्भुङ्क्ते ॥१६॥ द्वारं
सृजति ॥ १७ ॥ अग्निस्तक्मानमिति लाजान् पाययति
॥ १८ ॥ दावे लोहितपात्रेण मूर्ध्नि सम्पातानानयति
॥ १६ ॥ ओते म इति करीरमूलं काण्डेनेकदेशम्
॥२०॥ ग्रामात्पांसून् ॥२१॥ पश्चादग्नेर्मातुरुपस्थे मुसल-
“कैरातपृश्न०” ऋचा को पढ़कर छप्पर की ओलती के तृणों को जला-
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