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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 100, कुल 361 में से

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पृष्ठ 100

:
'द' 'दि' 'र्' 'ही' 'ति' -> "ददिर्हीति".
Then "तक्षकायैत्युक्तम् ॥ १ ॥" -> 'त' 'क्ष' 'का' 'यै' 'त्यु' 'क्त' 'म्' = "तक्षकायैत्युक्तम्".
Then "द्वितीयाया" or "द्वतीयया"?
In Bloomfield 29.2: "dvitīyayā grahaṇī"
In image: 'द्वि' 'ती' 'य' 'या' -> "द्वितीयाया" (it has an 'ा' on 'य'? No, 'द्विती' then 'य' then 'या' = "द्वितीयया"!).
Wait, look at 'य' in "द्वितीयया": is there an 'ा' on the first 'य'?
No! It is 'द्वि' 'ती' 'य' 'या' = "द्वितीयया"!
Wait, let's look at it: 'द्वि' 'ती' 'य' 'या' -> yes, "द्वितीयया"!

Now let's re-examine Line 7:
"॥२॥ सव्यं परिक्रामति ॥३॥ शिखासिचि स्तम्बानुद्ग-"
Wait, "स्तम्बानुद्ग-"
Line 8: "थ्नाति ॥४॥ तृतीयया प्रसर्जनी ॥५॥ चतुर्थ्या दक्षिणम-"
Line 9: "पेहीति दंशम तृण