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सर्वकोश
कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary

महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा

DevanagariSanskritpublished119 पृष्ठ

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174 Appendix II Appendix II 175
XXVI. ५.१२. RV. 7.72.1. आवृत्ततीरश्व नु द्विधाराः XII. २.३. RV. 10.30.10.
आग्निं न स्ववृक्तिभिः XXIII. १.१६. RV. 10.21.1. आ वह देवान् यजमानाय XII. ७.२. VS. 5.12.
आगमन्नाप उशतीर्बर्हिरेदं XII. २.२२. RV. 10.30.15. TS. 2.5.9.4.
आ च वह जातवेदः सुयजा च यज III. ५.४. (ŚŚ. 1.5.7.) आ वां रथो अश्विना श्येनपत्वा XVIII. ३.१६. RV. 1.118.1.
आ च्यावयस्तूतये XXIII. २.४६. RV. 8.92.7. आ वामुपस्थमद्रुहा IX. ३.२३. RV. 2.41.21.
आ जातं जातवेदसि VIII. १.१९. RV. 6.16.42. आ वायो भूष शुचिपा उप नः XXVI. १२.१. RV. 7.92.1.
आ त्वा रथं यथोतये XV. २.६. RV. 8.68.1. आ विश्वदेवं सत्पतिम् XX. ३.२१. RV. 5.82.7.
XIX. ५.२७. RV. 8.68.1. XXII. ३.२०. RV. 5.82.7.
आ त्वेषमुग्रमच ईमहे वयम् XXIII. ३.१८. RV. 3.26.5. आ विश्ववाराश्विना गतं नः XXVI. १२.१८. RV. 7.70.1.
आदित् सूर्य दिव्यारह्यो दृशे XXV. ५.२०. RV. 1.51.4. आविष्कृधि हरये सूर्याय XXV. ६.३. RV. 10.96.11.
आ देवो यातु सविता सुरत्नः XXIII. ३.४. RV. 7.45.1. आ सत्यो यातु मघवां ऋजीषी XXV. ६.६; ७.२८. RV. 4.16.1.
आ धेनवः पयसा तूर्ण्यर्याः XII. २.७. RV. 5.43.1. XXVI. १३.२०. RV. 4.16.1.
आ न इन्द्रो दूरादा न आसात् XXII. १.१७. RV. 4.20.1. आ सुते सिञ्चत श्रियं VIII. ४.७. RV. 8.72.13.
आ नूनमश्विनोर्ऋषिः VIII. ४.७. RV. 8.9.7. इळायास्त्व्वा पदे वयं IX. २.६. RV. 3.29.4.
आ नो देव शवसा याहि शुष्मिन् XXV. २.१२. RV. 7.30.1. इत्था हि सोम इन्मदे XXIII. ५.२२. RV. 1.80.1.
XXVI. ५.१२. RV. 7.30.1. इदं वसो सुतमन्धः XV. २.१३. RV. 8.2.1.
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः XX. ६.१२. RV. 1. 89.1. XIX. ५.२८. RV. 8.2.1.
आ नो विश्वाभिरूतिभिः VIII. ७.१२. RV. 8.8.1. इदं ते सोम्यं मधु XIII. ५.१७. RV. 8.65.8.
आपो न देवीरुप यन्ति होत्रियं XII. २.६. RV. 1.83.2. इदं त्यत् पात्रमिन्द्रपानम् XXIV. ६.१४. RV. 6.44.16.
आपो रेवतीः क्षयथा हि वस्वः XI. ३.६; ९.११. RV. 10.30.12. इदमहमवंसोः सदसि सीदामि VI. ७.८. (ŚŚ. 1.6.9.)
आप्रानं तीर्थं क इह प्र वोचत् XVIII. ७.८. RV. 10.114.7. इदमहं मां कल्याणीं कीर्त्यं स्वर्गाय लोकायामृतत्वाय XV. १.२५. (ŚŚ. 13.14.6.)
आ प्र यातु परावतः XXVI. ६.१८. AV. 6.35.1. दक्षिणां नयामि
VS. 18.72. इदमित्था रौद्रं गूर्तवचाः XXIII. ११.२३. RV. 10.61.1.
TS. 1.5.11.1. इन्द्र इत् सोमपा एकः XX. ३.१२. RV. 8.2.4.
आ भ्रात्यग्निरुषसामनीक VIII. ७.१६. RV. 5.76.1. इन्द्र इषे ददातु नः XXVI. १४.६. RV. 8.93.34.
आ यं हस्ते न खादिरं VIII. १.१७. RV. 6.16.40. इन्द्र एकं सूर्यं एकं जजान XXV. १.१३. RV. 4.58.4.
आयं गौः पृश्निरक्रमीत् XXVII. ७.१६. RV. 10.189.1. इन्द्रं रुद्रवन्तमा वह XII. ७.५. (ŚŚ. 6.9.13.)
आ यज्ञैर्देव मर्त्य XXIV. ५.१. RV. 5.17.1. इन्द्रं विश्वा अवीवृधन् XXIV. ६.१५. RV. 1.11.1.
आ यात्विन्द्रोडवस उप नः XXII. १.१४. RV. 4.21.1. इन्द्रं सिषक्त्युषसं न सूर्यः XXV. ७.३. RV. 1.56.4.
आ याहि वनसा सह XXVI. ६.११. RV. 10.172.1. इन्द्रः किल श्रुत्या अस्य वेद XXV. ३.१९; RV. 10.111.3.
आ याहि शूर हरी इह XVII. १.१८. (ŚŚ. 9.5.2.) ५.१०; १९; 5.11. RV. 10.111.3.
आ याह्यर्वाङुप बन्धुरेष्व XX. २.११. RV. 3.43.1. इन्द्रः कुत्साय सूर्यस्य सातौ XXV. ५.१. RV. 6.20.5.
आ रुद्रास इन्द्रवन्तः सजोषसः XX. ६.१९. RV. 5.57.1. इन्द्र क्रतुष्टमा भर XXIV. ५.२४. RV. 5.35.1.
XXIII. ६.३१. RV. 5.57.1. इन्द्र जुषस्व प्र वह XVII. १.१८. AV. 2.5.1.