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सर्वकोश
कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation

स्वामी महेश्वरानन्द गिरि द्वारा

स्रोत: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished56 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 56 में से

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तत उ ह बालाकिस्तूष्णीमास तं होवाचाजातशत्रुरेतावन्नु
बालाकीति एतावद्धीति होवाच बालाकिस्तं होवाचाजातशत्रुर्मृषा
वै किल मा समवादयि । । २४ । ।
इस पर बालाकि चुप हो गया । तब अजातशत्रु ने कहा—"क्या
इतना ही तू जानता है"? गार्ग्य ने कहा—"इतना ही जाना है" ।
अजातशत्रु बोला—"मैं तुझसे ब्रह्म का वर्णन करता हूँ ।।२४ ।।
ब्रह्म ते ब्रवाणीति होवाच स यो वै बालाक एतेषां पुरुषाणां
कर्त्ता यस्य वैतत्कर्म स वेदितव्य इति । । २५ । ।
ऐसा कह कर वृथा ही तू मुझसे संवाद करने को आया है। हे
बालाकि, इन सब पुरुषों का जो कर्त्ता है, उसी ने यह विश्व उत्पन्न
किया है और वही एक जानने के योग्य है ।।२५ ।।
तत उ ह बालाकिः समित्पाणिः प्रतिचक्रामोपयानीति तं
होवाचाजातशत्रुः प्रतिलोमरूपमेव स्याद्यत्क्षत्रियो ब्राह्मणमुपन-
यीतैह्येव त्वा ज्ञपयिष्यामीति तं ह पाणावभिपद्य प्रवव्राज । । २६ । ।
तदनन्तर हाथ में समिधा ग्रहण करके बालाकि उसके पास जाकर
बोला—"मैं तेरे पास (शिष्य भाव से) आया हूँ"। अजातशत्रु ने
कहा—"क्षत्रिय ब्राह्मण को उपदेश दे यह अयोग्य होगा। चल मैं तुझे
समझाता हूँ"। "पश्चात् उसका हाथ पकड़ कर वह चलने
लगा ।।२६ ।।
तौ ह सुप्तं पुरुषमीयतुस्तं हाजातशत्रुरामन्त्रयांचक्रे
बृहन्पाण्डरवासः सोमराजन्निति स उ ह तूष्णीमेव शिश्ये तत उ
हैनं यष्ट्या विचिक्षेप स तत एव समुत्तस्थौ तं । । २७ । ।
वे दोनों एक सोये हुए पुरुष के पास गये। अजातशत्रु ने
पुकारा—"हे ब्रह्मन् शुद्ध वस्त्र वाले! हे सोम राजन्! परन्तु वह चुप