कात्यायन श्रौतसूत्रम् (शुक्ल यजुर्वेद काण्व-माध्यन्दिनीय श्रौत-कर्मकाण्ड सटीक)

कात्यायन श्रौतसूत्रम् (शुक्ल यजुर्वेद काण्व-माध्यन्दिनीय श्रौत-कर्मकाण्ड सटीक)
Katyayana Shrautasutram of Shukla Yajurveda with Commentary
महर्षि कात्यायन (भाष्य: याज्ञिक श्रीदेव) द्वारा
DevanagariHindipublished114 पृष्ठ
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े->तस्मिन्पक्षे. Let's write तस्मिन्पक्षे(orतस्मिन्यक्षे`? No, 'तस्मिन्यक्षे' makes no sense in Sanskrit, 'पक्षे' is the universal word for 'in that pakṣa/view', contrast with 'एकमेवेदं सूत्रम्... एके आचार्या विकल्पेन... अत एवंविधमेकीयमतम्—यदेकविंशतिकाष्ठक इध्मः । तस्मिन्पक्षे चेध्मादेव त्रीणि काष्ठान्यादाय परिधिपरिधानमिति ॥').
- It is definitely
तस्मिन्पक्षे. - Line 18:
देव त्रीणि काष्ठान्यादाय परिधिपरिधानमिति ॥ - Line 19:
बन्धनान्तरमिध्मबर्हिषोर्भूयौ निधानं न कार्यम् । आपस्तम्बसूत्रे “अनधो- Wait! Let's re-examine
भूयौvsभूमौ! - Look at
बन्धनान्तरमिध्मबर्हिषोर्भूयौvsभूमौ: - Wait, look at the letter: is it
मorय? - Wait! Look at
यinकार्यम्: it has the notch on the left! - In
भू...: it hasय
- Wait! Let's re-examine