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सर्वकोश
कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (उद्गम)

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पृष्ठ 27

Let's do a careful line-by-line transcription of the image.

  • Header:
    १४ (left) कथासरित्सागर (center)

  • Line 1:
    अप्राप्तचूर्णं ताम्रं च न सुवर्णीबभूव तत्।

  • Line 2:
    एवं त्रिः कुर्वतस्तस्य बटोर्मोघः श्रमोऽभवत् ॥८६॥

  • Line 3:
    सुप्ते विषण्णावादाय राजा तस्माद् बटोः स्वयम्। (Wait, let's look at the image: सुप्ते विषण्णावादाय? No, सुप्ते विषण्णादादाय? Let's look at the letters: सु प्ते वि ष ण्णा वा दा य? No, सुप्ते विषण्णावादाय? Let's look at the image: सुप्ते विषण्णावादाय? No, सुप्ते विषण्णावादाय? Let's look at the letters: सु प्ते वि ष ण्णा वा दा य? Yes, सुप्ते विषण्णावादाय? Wait, सुप्ते विषण्णावादाय