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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

पृष्ठ 675, कुल 828 में से

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पृष्ठ 675

ः प्रतिघातेऽनिट्त्वं विहितम्, हृषेस्तुष्टौ सेट्त्वम्। तयोरुभयोरपि ग्रहणम्..."
Wait! Let's check the exact text of Kasika on 7.2.29:
"लोमसु वर्तमाने हृषेर्निष्ठायां वा इडागमो न भवति। हृष्टानि लोमानि, हृषितानि लोमानि। हृष्टं लोमभिः, हृषितं लोमभिः। हृष्टाः केशाः, हृषिताः केशाः। हृष्टं केशैः, हृषितं केशैः।"
Then:
"हृष अलीकप्रतिघाते दिवादिः, तस्य" or what?
In Nyasa / Padamanjari:
"हृषीरलीकप्रतिघाते दिवादिः, तस्यानिट्त्वं प्रसिद्धम्। हृष तुष्टाविति भ्वादिः सेट्। तयोरुभयोरपीह ग्रहणम्..."
Wait, what does our printed text say?
Let's look at line 25:
"हृ षु अ ली क प्र ति घा ता -" -> wait, "प्रतिघाते"?
Wait, look at the last word of line 25: "प्रतिघाता-"? No, it has:
"हृ षु" or "हृ ष"?
Then "अ ली क प्र ति घा ते" or "घा ता"?
Wait, look at line 2