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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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тилोपः ॥
L25: अह्नोष्टखोरेव ॥ १४५ ॥
L26: अहन्नित्येतस्य टखोरेव परतष्टिलोपो भवति । द्वे अहनी समाहृते,
L27: द्व्यह्नः । त्र्यह्नः । द्वे अहनी अधीष्टो भृतो भूतो भावी वा द्व्यहीनः । त्र्यहीनः ।
L28: अह्नां समूहः क्रतुः, अहीनः ॥ अह्नः समूहे खो वक्तव्यः ॥ * ॥ सिद्धे सत्या-
L29: रम्भो नियमार्थः । इह मा भूत । अह्ना निर्वृत्त, माह्निकम् । एवकारकरणं
L30: विस्पष्टार्थम् । अह्न एव टखोरित्येवं नियमो न भविष्यति, आत्माध्वानौ खे
L31: इति प्रकृतिभावविधानात् ॥
L32: ओर्गुणः ॥ १४६ ॥

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