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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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पृष्ठ 510

िवक्तव्या ॥ * ॥ स्वैरः । स्वैरी । पा० २ ।"
Wait, let's read line 31 carefully:
"* स्वादीरेरिण्योर्वृद्धिर्वक्तव्या ॥ * ॥ स्वैरः । स्वैरी । पा० २ ।"
Wait, does it say "वृद्धिर्वक्तव्या"?
In line 31: "* स्वादीरेरिण्यो" then "र्वृद्धिर्वक्तव्या" is partly blurred or smudged?
Look at it: "* स्वादीरेरिण्यो" then smudged letters: "र्वृद्धिर्वक्तव्या" - yes, you can see 'र्वृ', 'द्धि', 'र्व', 'क्त', 'व्या'!
Then "॥ * ॥ स्वैरः । स्वैरी । पा० २ ।"

Line 32:
"† अत्र वार्त्तिके ऊहग्रहणं प्रौह इति तदुदाहरणं च पुस्तकान्तरेऽधिके ।"
Let's check every character:
"† अत्र वार्त्तिके ऊहग्रहणं प्रौह इति तदुदाहरणं च पुस्तकान्तरेऽधिके ।"
Everything matches!

Let's double check L11-14:
L10: आद्गुणः ॥ ८७ ॥
L11: अचीत्यनुवर्तते । अवर्णात्परो यो ऽच् अचि च पूर्वो यो ऽवर्णस्तयोः
L12: पूर्वपरयोर्वर्णयोः स्था