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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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पर्यायेण वा मा...
जक्षित्यादयः षट् ॥ ६ ॥
अभ्यस्तमिति वर्तते...
ऽभ्यस्तसंज्ञा भवन्ति...
हसनयोरित्यतः...
दरिद्रति। चकासति...
त्येष स्वरः...
च्छतुरिति नुमः प्रतिषेधः॥

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Everything looks completely solid and faithful to the printed image. Ready to write the final transcription.॥ काशिका ॥ ६ । १ ॥ ४८९
रति किम्। ईचिचिषिषते। संयोगादय इति किम्। प्राशिशिषिषति। अनितेरुभौ
साभ्यासस्येति षात्वम्। अनादेरित्येव। दिद्भासति। के चिदजादेरित्यपि पञ्च-
म्यन्तं कर्मधारयमनुवर्त्तयन्ति। तस्य प्रयोजनम्। इन्द्रीयीषिषतीति। अजादे-
रनन्तरत्वाभावाद् दकारो द्विरुच्यतएव नकारो न द्विरुच्यते। इन्द्रमिच्छति।
क्यच्। तद