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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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पृष्ठ 467

अर्जुनतो ऽभवन् । आदित्याः कर्णतो ऽभवन् । षष्ठी चात्र पक्षा-
र्थेष्वेव । अर्जुनस्य पक्षे कर्णस्य पक्ष इत्यर्थः । व्याश्रयेति किम् । वृक्षस्य शाखा ॥

Wait, check L28 start:
"र्तरीत्येव ।" vs "र्त्तरीत्येव ।":
In L28, it has single त: 'र्तरीत्येव ।'. Look at 'र्त': yes, single 'त' with repha!
Check L24: "विभक्तिरकर्त्तरि" vs "विभक्तिरकर्तरि":
In L24: "विभक्तिरकर्त्तरि" - it has double त्त.
In L23: "अकर्त्तरि" - double त्त.
In L14: "क्षेपेष्वकर्त्तरि" - double त्त.
In L16: "चेत्कर्त्तरि" - double त्त.
In L21: "अकर्त्तरीति" - double त्त.
In L28: "र्तरीत्येव" - wait, look at L28: it has 'र्त' or 'र्त्त'?
Ah, look at L28: the letter has a repha, and underneath, it is 'र्त' or 'र्त्त'?
Wait, the vertical stroke has a crossbar? No, it looks like 'र्त' or maybe slightly smudged