काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)
Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras
आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 160, कुल 828 में से
संदर्भ में पढ़ेंत् । अग्लुञ्चीत् । अश्वत् । अशवयित् । अशि-"
Wait, is it "अशवयित्" or "अशवायित्"?
"अ श व यि त्" -> "अशवयित् ।"
Line 18:
"श्वियत् । म्लुचुग्लुञ्चोरिकारोपदानेपि रूपत्रयं सिद्ध्यत्यर्थभेदात्तु द्वयोरुपादानं"
Wait, let's check:
"श्वियत् ।"
"म्लुचुग्लुञ्चोरिकारोपदानेपि" -> wait! "म्लुचुग्लुञ्चो-" or "म्लुचुग्लुचो-"?
Look at line 18:
"म्लु चु ग्लु च्वो रि का रो प दा ने पि" -> wait!
Is it "म्लुचुग्लुच्वोरिकारोपदानेपि"?
Look at the characters:
"म्लु चु ग्लु" then "च्वो"? Or "ञ्चो"?
Wait, line 19 has: "द्वयोरुपादानसामर्थ्याद् ग्लुञ्चेरनुनासिकलोपो न"
Ah! "ग्लुञ्चेः" has अनुनासिक, so it's "म्लुचुग्लुञ्चोः"!
Wait, why does line 18 say:
"म्लुचुग्लुञ्चोरिकारोपदानेपि" or