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सर्वकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

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लोग सोचते हैं कि 'मरा' ' मरा' जपा था । नहीं, यह तो उलटा जाप था। पलटू साहिब कह रहे हैं-

अरे हाँ रे पलटू, ज्ञान भूमि के बीच में चलत हैं उलटी स्वांसा ॥

साहिब कह रहे हैं—

पवन को पलट कर, शून्य में घर किया ।

धर में अधर भरपूर देखा ॥

कहैं कबीर गुरु पूरे की मेहर से, त्रिकुटी मध्ये दीदार देखा ॥

सुषुमना कैसे खुले ? यह बंद है कफ़ से । शरीर में कफ, पित्त और वायु हैं। साहिब कह रहे हैं-

गगन की गुफा को पवन से साफ कर ॥

, यह गुफा कौन सी है ? दम ही दम में ले अजूबा 11 कैसे साफ़ करें ? पंखा लगाना है क्या ? यह गगन की गुफा पवन से कैसे साफ़ करें ? वाणियों में लिखा है, पर पूरा गुरु न समझाए तो समझ नहीं आयेगी। यह स्वाँस, नाम एक करना है। स्वाँस में गर्मी है। आप दौड़ते हैं तो शरीर गर्म हो जाता है। गर्मी से कफ़ पिघलता है । इस तरह स्वाँस - नाम एक करने से स्वाँसा की गर्मी से कफ़ पिघलने लगता है । जब भी बंकनाल से कफ़ पिघलेगा तो एक आवाज़ आयेगी, जैसे नाखून बजाते हैं। ऐसी बारीक आवाज़ आयेगी। कफ़ को भेदती हुई वायु ऊपर जायेगी। यदि साधक यह क्रिया कर रहा है तो गुरु का सान्निध्य चाहिए। जैसे- जैसे स्वाँसा उर्द्धमुख होती जायेगी, साधक को गुरु के सान्निध्य की ज़रूरत पड़ेगी। साधक को लगेगा कि कोई ताक़त ऊपर की ओर खींच रही है । स्वाँसा की गर्मी से कफ़ पिघल जाता है । पर मन कभी नहीं चाहता है कि आप वहाँ पहुँच पाएँ। क्योंकि जानता है कि यदि पहुँच गया तो वो समझ में आ जायेगा और जगत ख़त्म हो जायेगा । इसलिए मन ने भ्रमित किया है।

सुषुम्न मध्ये बसे निरंजन, मूँधा दसवाँ द्वारा ।

उसके ऊपर मकरतार है, चढ़ो सम्हार सम्हारा ॥

मन इतने स्टॉइल से आपको ले जायेगा कि पता भी नहीं चलेगा। ऐसे में साधक क्या कर सकता है ? कभी भयभीत हो जाता है। फौरन मन ध्यान को कहीं ले जाता है। किसी चीज़ का दुख है तो वहाँ ले जायेगा। इतने में जो पवन