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सर्वकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 264 में से

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कह रहे हैं कि यहाँ सब पर मौत का साया मण्डरा रहा है । काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि की आग लगी हुई है, जिसमें सारा संसार जल रहा है। इसलिए इस जलते हुए संसार को छोड़ और हमारे देश में चल। अफसोस लिया लूट धरम धरमन धूरत। एक इश्क जदः भई है हर कौन किया भौन है यह हुस्न है औरत ॥ मोहिनी मूरत । दिल पार हुवा पार: बमह पारए

सूरत॥

बाजार खड़े मार वा बीमार नजारे ।

चल हंस अचल मोलि दो मावाय हमारे ॥

यहाँ पर आत्मा का धर्म लूट लिया गया है, उसका लोप हो गया है। यहाँ पर प्रेम करने के लिए एक सुन्दर स्त्री बनी है। सब उसी पर मोहित हो रहे हैं। यहाँ सबको यह रोग लगा हुआ है। इसलिए हे हंस! तू इस संसार को छोड़ और हमारे देश में चल । कैलास चलेगा व अमरावती अलकावती गोलोक जिनूँ लोक चलेगा ॥ चलेगा। सब स्वर्ग चलेगा व तपोलोक चलेगा। जो हद्द जनो मर्द में सो लोक

चलेगा ॥

वो भी जल जावे जहाँ नौलाख

सितारे | चल हंस अचल मोलिदो मावाय

हमारे ॥

यहाँ जो कुछ भी देख रहे है, एक दिन नष्ट हो जायेगा। स्वर्ग लोक, तप लोक आदि भी नहीं रहेगा। नौ लाख तारे भी नहीं रहेंगे । इसलिए हे अमर हंस! तू इस नश्वर संसार को छोड़कर उस अमर - धाम को चल । कोई न रहे एक पुरुष लोक रहेगा । आवे जो वहाँ से सो ख़बर उसकी

कहेगा ॥

सब कौल कर शमः अजिले सोल बहेगा ।

जिसको वह नजर आवे सो फिर कछु न

चहेगा ॥

निश्चल सो रहे कायक जहाँ अमृतधारे ।

चल हंस अचल मोलि दो मावाय हमारे ॥

अगर कुछ अमर है, अगर कुछ रहेगा तो वो परम - पुरुष का लोक ही