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कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Karpuramanjari Sattaka of Rajasekhara with Commentary

महाकवि राजशेखर द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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पृष्ठ 167

२
ज० श्लो० | ज० श्लो०
| णअणाईं पसइसरिसाइँ २ ३८
च | त
चंडवालधरणोहरिणंकौ १ २१ | तदो चडस्सद्विसु सुत्तिसु ३ ४
चाहुआणकुलमोलिमालिआ १ ११ | तहा रमजवित्थरो जहू ण १ १४
चित्ते बहुहदि ण खुद्दवि २ ४ | ताडंकजुअं गडेसु २ ३७
छ | तारदोलणहेलासरंत २ ३५
छोछंति दंतरअणाइ ४ १४ | तिक्खागे तरलाणे २ ४६
ज | तिअलिवलिअणाही २ २४
जं धोअंजणसोणलोअणजु १ २६ | तिस्सा तायपरिक्खिणाअ २ २९
जं मुक्का सवणंतरेण सहसा १ २९ | तीए णिअंबफलए २ १५
जच्चजणजणिदपसाहणाइँ २ १९ | तेणं च मुत्ताहलमंडलेण ३ ५
जर्सिं विअप्पघडणाइ ३ १० | थ
जाअं कुंकुमपकलीडमरी १ १६ | थोरण थण आग २ २०
जा चक्कवट्टिघरिणी ३ १५ | द
जाण सहाअपसरत ३ ११ | दसेमि तं पि १ २५
जाणे पंकरुहाणणा ३ ३ | दज्झातागुर भूपयटिकल्लिआ ३ २७
जिस्सा दिट्ठी सरलधवला २ २३ | दट्टूण थोरथणतुगिमाण ३ ६
जिस्सा पुरो हरदि ३ ७२ | दिण्णा वल्लभालयलीड २ १६
जे घंटआ ४ २० | दिसवहुतसो ३ २१
जे णवस्स तिउसस्म ३ २४ | दूरे किआसु चंपभस्स ३ १
जे तीम तिक्खघलचस्स्रुति २ ५ | देता कप्पूरपूरप्फुरणमिव ३ २८
जे लंकागिरिमेहलादिँ १ २० | दोलारूविट्ठेओ यहं २ ३९
ण | प
णट्ठाणाहिं तित्तरं पि २ १ | पहीणं गंडवालीपुटमजचत्र १ १५
णवउरवअरुक्खो २ ४४ | पंचुच्छविसुरिद ४ ४
णहवट्टिदजोण्हाणिब्भरे ३ ७ | पंडुरेंग राह रअए ३ १२
णिम्मग्गचंगस्स वि २ २५ | परं जोन्हा उण्हा गरल्मरि २ ११
णिसा तरिणविथरा ४ २ | पअंगं णवरूअभंगिपदणा ४ ८
णीसासा हारलट्टीपरिसप २ १० | परिब्भमंतीअ ४ १६
णूणे हुवे इह २ १७ | पहया सब्भर्येपा १ *
ण्हागारमुक्काइरणुयभाए १ २८ |