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कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

कर्पूरमञ्जरी (महाकवि राजशेखर - प्राकृत सट्टक एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Karpuramanjari Sattaka of Rajasekhara with Commentary

महाकवि राजशेखर द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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पृष्ठ 166

कर्पूरमञ्जरीस्थश्लोकानां सूची ।

ज० श्लो० | ज० श्लो०
अ | ए
अंगं चंगं णिअगुणगणालंकि १ ३३ | एकेण पाणिणलिणेण १ २७
अंगं लावण्णपुण्णं ३ १९ | एन्द वासरजीअपिंडसरिमं १ ३५
अंतो णिणिट्टमगं० ३ १२ | क
अकलितपरिरंभविव्भमाइं १ २ | कंदम्मि नीअ टविद्दो २ १७
अणुकुंकुममचदणं ३ २६ | कप्पंतवेलिभवणे ४ १८
अगग्गम्मि भिंगसरणी २ ६ | कावि वाल्हिकराल ४ १५
अत्थविसेसा ते चित्त १ ७ | किं कञ्ज खित्तिमेण २ २८
असोअत्तरताडणं २ ४७ | किंकिणीकंदरुणज्झणयहा ४ १६
आ | किं गेभणट्टविहिणा १ १४
आस्थाणीजणलोभणाग २ ३ | किं मेहलावलेण ३ १३
इ | किं णेअगेहिं ३ १६
इअ मुआइ विलासुज्जलाई २ ४० | कियदसरचरणा वि २ ४२
इअ देवीअ जहिच्छं २ २२ | कीए वि संघडदि ३ ९
इमा मसीकञ्जलकालकाआ ४ १३ | कुंतलेसरमुखा ४ २१
इह कुसुमसरफ्फगोत्तराणं ४ १ | कुडिलालआण माला २ २०
इह जह वि कामिणीण २ ४८ | कुरअडनिल्अञ्जमगोआ २ ४३
ई | केदईकुसुमपत्तसंपुडं २ ७
ईसारोसपसाभप्पणइसु १ ४ | खोउहलत्तसवंचलवेमा ४ १७
उ | ग
उप्पाडिज्जंति १ ३६ | गाअंतगोअअवधूहपभंफेरि १ २१
उचेहिं गोउरेहिं २ ३१ | घ
उठ्ठिऊण घणभारभंगुरं ३ २१ | घणमुञ्चट्टिदमगं २ ३२
उवएसु वि सरणेसु २ १८ | घणमारतारण अणाइ २ २१
उबरिट्ठिअयगप्पब्भार० २ ३३ |
क० म० ११