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सर्वकोश
कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

Kamandakiya Nitisara with Hindi Commentary

आचार्य कामन्दक / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished164 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 164 में से

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पृष्ठ 54

৭ম সর্গ ] आत्मरक्षा। ४३
विष संयुक्त हइले उहादेर उपरे मयला जमिया याय एबং उहादेर प्रभाव
( कार्यकारित्व ) स्नेह ( चाकचिक्य ) गुरुता ( भार ) वर्ण एबং स्वाभाविक
स्पर्शगुण नष्ट हइया याय ॥२४॥
मुख शुकाइया याय एबং नीलवर्ण हय ओ त्वग्भेद ( गाये फोष्का ) हय,
( पाठान्तरे—वाग्भङ्ग अर्थात् कथा जड़ाइया याय ) बार बार हाइ उठे,
टले पड़े, काँपिते थाके, घर्म्म हय, निजेर वशे थाकिते पारे ना,
दृष्टि स्थिर थाके ना, निजेर काज करिते करिते अक्षम हइया पड़े,
एबং निजे ये स्थाने अवस्थान करितेछे सेस्थाने स्थिर थाकिते पारे ना—
एइगुली विचक्षण व्यक्ति विषपानकारी व्यक्तिते लक्ष्य करिबेन ॥२५-२६॥
औषध सरबत् जल एबং खाद्य द्रव्य—एइ समस्त आहार काले याहारा
प्रस्तुत करियाछे ताहारिगेके खाओयाइया राजा स्वयं खाइबेन ॥२७॥
परिचारिकागण, विशेषभावे परीक्षा करिया मुद्रित अर्थात् मोड़केर
उपर परीक्षकेर छापयुक्त प्रसाधनद्रव्य ( क्षुर, नरुन, काँचि गन्धद्रव्य
तैल प्रभृति ) नृपतिर्के आनिया दिबे ॥२८॥ परेर निकट हइते ये
समस्त आसिबे ताहा समस्तइ परीक्षा करिते हइबे। रक्षकगण निजेर लोक
एबং पर हइते राजाके सर्व्वदा रक्षा करिबे ॥२९॥
राजा निजेर जानित अथवा विश्वस्त व्यक्तिर अनुमोदित याने एबং
वाहने आरोहण करिबेन। अपरिचित किंवा सङ्कट ( एकखानि गाड़ीमात्र
याइते पारे এইরূপ संकीर्ण ) पथे याइबेन ना ॥३०॥ याहादेर काजे
কখনও दोष देखा याय नाइ एबং वंशपरम्परार विश्वस्त ताहारिगेके एक
एक विभागे नियुक्त करिया निजेर सन्निकटे राखिबेन ॥३१॥ अधार্ম্মिक,
क्रूर, याहादेर दोष दृष्ट हइयाछे, याहारा पदच्युत हइयाछे एबং शत्रुर निकट
हइते याहारा आसियाछे इहादिगके दूर हइते त्याग करिबेन ॥३२॥
ये नौका ঝড় खेयेछे, याहार नाविकलरा परीक्षिक्षत नय ( पाठान्तरे—अविश्वस्त
नाविकगणे परिपूर्ण ), ये नौका अन्य नौकार साहाय्ये चले अथवा