कल्याण: उपनिषद् अङ्क
Kalyan Upanishad Ank
गीताप्रेस द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 621, कुल 832 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपनिषद् ४ ] * महान्तं विभुमात्मानं मत्वा धीरो न शोचति * ५७५
देवता भलीभाँति निवास करते हैं। जो उपासक उन स्वप्रकाश
परमात्माको नहीं जानता, वह ऋचाओंके स्वाध्यायसे क्या कर
लेगा ? तथा जो उन परमात्माको जानते हैं, वे ही ये उपासक
उनके परमधाममें सुखपूर्वक निवास करते हैं।' इसी प्रकार जो
सावित्र-मन्त्रको जानता है, उसको ऋक्, साम और यजुर्वेदके
मन्त्रोंसे कोई प्रयोजन नहीं है।
ॐ भूर्लक्ष्मीर्भुवर्लक्ष्मी स्वर्लक्ष्मी कालकर्णी तन्नो महा-
लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।
'जो सच्चिदानन्दमयी देवी भूर्लोककी लक्ष्मी-शोभा,
भुवर्लोककी लक्ष्मी तथा स्वर्लोककी लक्ष्मी हैं, जो कालकर्णी
नामसे विख्यात हैं, वे भगवती महालक्ष्मी हमें सत्कमोंके लिये
प्रेरणा देती रहें।' निश्चय ही यह महालक्ष्मीकी यजुर्वेदोक्त
गायत्री है, जो चौबीस अक्षरोंकी है। यह सब—जो कुछ
यह प्रतीत हो रहा है, निःसन्देह गायत्री ही है। इसलिये जो
इस यजुर्वेदसम्बन्धिनी महालक्ष्मी गायत्रीको जानता है, वह
बड़ी भारी सम्पत्तिको प्राप्त होता है।
ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नः सिंहः
प्रचोदयात् ।
'ॐश्रीनृसिंहदेवकी प्राप्तिके लिये हम उपासना करते हैं,
वज्रके समान नखोंवाले उन भगवान्के लिये ही उनके
स्वरूपका हम चिन्तन करते हैं, वे भगवान् नरसिंह हमे
प्रेरणा दें।' यही नृसिंहगायत्री है, जो देवताओं और वेदोंका
भी आदि कारण है। जो इस प्रकार जानता है, वह आदि-
कारणभूत भगवान्से संयुक्त होता है ॥ ३ ॥
देवताओंने प्रजापतिसे फिर पूछा—'भगवन् ! किन
मन्त्रोंसे स्तुति करनेपर भगवान् नृसिंहदेव प्रसन्न होते और
अपने स्वरूपका प्रत्यक्ष दर्शन कराते हैं, यह हमें बतलायें।'
यह सुनकर उन सुप्रसिद्ध प्रजापतिने कहा-
ॐ उं ॐ यो ह वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च ब्रह्मा
भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १ ॥
ॐ ग्रं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च विष्णुर्भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ २ ॥
ॐ वीं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च महेश्वरो
भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३ ॥
ॐ रं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च पुरुषो भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ४ ॥
ॐ मं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्चेश्वरो भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ५ ॥
ॐ हां ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या सरस्वती
भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ६ ॥
ॐ विं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या श्रीर्भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ७ ॥
ॐ ष्णु ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या गौरी भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ८ ॥
ॐ ज्व ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या प्रकृति-
र्भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९ ॥
ॐ ल ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या विद्या भूर्भुव
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १० ॥
ॐ त ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्चोङ्कारो भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ११ ॥
ॐ स ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्याश्चतस्रोऽर्ध-
मात्रा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १२ ॥
ॐ वं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च वेदाः साङ्गाः
सशाखा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ १३ ॥
ॐ तों ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये पञ्चाग्नयो
भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ १४ ॥
ॐ मु ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या सप्तव्याहृतयो
भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ १५ ॥
ॐ खं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये चाष्टौ लोक-
पाला भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १६ ॥
ॐ नृं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये चाष्टौ वसवो
भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १७ ॥
ॐ सिं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च रुद्रा भूर्भुव
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १८ ॥
ॐ हूं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च आदित्या
भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १९ ॥
ॐ मी ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये चाष्टौ ग्रहा
भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २० ॥
ॐ पं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यानि पञ्च महा-
भूतानि भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २१ ॥
ॐ णं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च कालो भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २२ ॥
ॐ भ ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्यश्च मनुर्भूर्भुवः
स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २३ ॥