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कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

[३२६ ] कल्कि पुराण

से इन्द्र पराजित होने लगे और त्रैलोक्य-विजयी हिरण्याक्ष इन्द्र को
म रने मे तत्पर हुआ, तब आपने ही वाराह रूप धारण कर उसका
सहार कर डाला। ऐमे आप हमारी रक्षा कीजिये ।२२। जब देवता
और दैत्य दोनो ही मिल कर समुद्र-मन्थन मे तत्पर हुए, तब नदगचल
पर्वत को टिकाने की समस्या उत्पन्न हुई । उस समय आपने कूर्मावतार
धारण कर अपनी पीठ पर मन्दराचल को टिका लिया । आपका वह
कूर्मावतार देवताओ को सुधा-पान कराने के लिये ही हुआ था। हे परेश !
आप ही हम दीन राजाओ की रक्षा कीजिये ।२३।
पुनरिह त्रिभुवनजयिनो महाबलपराक्रमस्य हिरण्यकशिपोर-
र्द्दिताना देववराणा भयभीताना कल्याणाय दितिसुतवधप्रे-
प्सुर्ब्रह्मणो वरदानादवध्यस्य न शस्त्रास्त्ररात्रि दिवास्वर्गम-
र्त्यपातालतले देवगन्धर्वकिन्नरनरनागैरिति विचिन्त्य नर-
हरिरूपेण नाखाग्रभिन्नोरु दष्टवन्तच्छद त्यक्तासु कृत
वानसि ।२४।
पुनरिह त्रिजगज्जयिनो बले, सत्र शकानुजो वटुवामनोदैत्यस
माहनाय त्रिपदभूमियाञ्चाच्छलेन विश्वकायस्तदुत्सृष्ट-जल-
सस्पर्श-विवृद्धमनोऽभिलाषस्तव भू र्ले बलेर्दोवारिकत्वमङ्गी-
कृतमुचित दानफलम् ।२५।
पुनरिह हैहयादिनृपाणाममितबलपराक्रमाणा नाना मदोल्ल-
ङ्घितमर्यादावर्त्मना निधनाय भृगुवंशजो जामदग्न्य पितृहो-
मधेनुहरणप्रवृद्धमन्युवशात्रिसप्तकृत्वो निःक्षत्रिया पृथिवी कृ-
तवानसि परशुरामावतारः ।२६।
फिर जब त्रैलोक्य विजयी, महाबली और पराक्रमी हिरण्यक-
कशिपु देवताओ का उत्पीडन करने लगा, तब आपने भयभीत देवताओ के
रक्षार्थ उस दैत्यराज का सहार करन का निश्चय किया । ब्रह्माजी के
वरू से दैत्य, देवता गन्धर्व, किन्नर, नाग, शस्त्रास्त्र, दिवस, रात्रि, स्वर्ग,