कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 367, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें३७० శ్రీ శ్రీकालिका पुराण
मत्स्य, शंख के अंकित चक्रों से और ध्वजों में भूषित करना चाहिए ।
सुवर्ण और रत्नों से तथा अनेक फलों के द्वारा सैन्धव की सिद्धि के
लिए भल्लातक शालिकुष्ठ, तोरण, कण्ठ देश में पुष्टि और शान्ति के
लिए बाँधे । वैष्णव मण्डल की रचना करके दिक्पालों और नवग्रहों
का तथा विश्वेदेवों का और विष्णु मुख्यों का पूजन करना चाहिए ।
पुरोहित तिलों से मिश्रित घृत, यव और पुष्पों में रवि का, वरुण का,
प्रजेश का, इन्द्र देव का, भगवान् विष्णु का होम सात दिन करे ।
एक-एक सहस्र अथवा अष्टोत्तर शत जप करे और चतुर्वर्ग की सिद्धि
के लिए प्रति दिन होम करना चाहिए । समिधायें भी हवन के लिए
पलाश (ढाक) अथवा खदिर की होनी चाहिए । पुरोहित के द्वारा
समिधायें उदुम्बर (गूलर) की हो तथा पीपल की समिधा होम में ग्रहण
करनी चाहिए ।
फलाग्रम्बर से योजित आठ कलश रखे । वे कलश चाँदी, सुवर्ण
अथवा इच्छानुसार मृत्तिका के ही होवें । हरिताल, चन्दन, कुष्ठ,
प्रियंगु, में नसित, अञ्जन, जल्पी, श्वेतदन्ती, भल्लातक, पूर्णकोश,
सहदेवी, शतावर, वज्र, सनगाकु, सुममोराजी, सुगुप्तिका, तुत्थ, करबीर,
तुलसीदल, इन सब को पुरोहित कलशों के मध्य में निक्षिप्त कर देवे ।
हे नृप! नीराजन विधि में शान्ति की कामना से कनक, अम्बुज अथवा
यश के काष्ठों के द्वारा स्रुक् और स्रुव बनवाने चाहिए । उस प्रकार
से एक सप्ताह पर्यन्त पूजा करे । इस प्रकार से पूजन करके नृप एक
सप्ताह तक समाचरण करे । जब तक नीराजन करे तब तक राजा को
गृह में वास करना चाहिए ।
शान्ति की इच्छा रखने वाले नृप को रात्रि के समय में यज्ञ भूमि
में निवास नहीं करना चाहिए । राजा उस अश्व पर अथवा हाथों पर
आरोहण न करे । जब तक एक सप्ताह होवे राजा को दूसरे ही किसी
यान के द्वारा गमन करना चाहिए । अनेक प्रकार के अन्न के व्यञ्जन
से सम्भूत भक्ष्यों से, मधु, पायस, यावको से अथवा मोदकों के द्वारा
बलि करे । एक सप्ताह तक पूर्व में बताते हुए देवताओं की उत्तम बलि